जामताड़ा: मौत के बाद किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना और उसके शव को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है. जामताड़ा सदर अस्पताल में एक 40 वर्षीय युवक की मौत के बाद उसका शव करीब दस दिनों तक पहचान और अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में रहा.


आखिरकार जामताड़ा थाना प्रभारी मनोज कुमार महतो और चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सह समाजसेवी संजय अग्रवाल की पहल पर अजय नदी स्थित श्मशान घाट पर युवक का अंतिम संस्कार कराया गया.
सुबह अस्पताल में भर्ती, कुछ घंटे बाद मौत
जानकारी के अनुसार, एक अक्टूबर की सुबह करीब आठ बजे एक महिला और पुरुष लगभग 40 वर्षीय युवक को सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. युवक शारीरिक रूप से कमजोर था और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी.
अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ घंटे बाद सुबह करीब 11:30 बजे उसकी मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मृतक की पहचान और उसके परिजनों का पता लगाने का प्रयास शुरू किया.
बताए गए पते पर नहीं मिला कोई परिजन
बताया जाता है कि युवक को अस्पताल लाने वाले महिला और पुरुष ने संपर्क के लिए कोई मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं कराया. उन्होंने मृतक का पता नाला थाना क्षेत्र के अफजलपुर गांव का बताया था. अस्पताल प्रबंधन ने इस पते के आधार पर परिजनों तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली.
इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने नाला थाना प्रभारी विकास कुमार यादव से संपर्क कर मृतक की तस्वीर भेजी. पुलिस ने संबंधित गांव में तस्वीर दिखाकर पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी युवक को पहचान नहीं सका. ऐसे में मृतक की पहचान और उसके परिजनों का पता लगाने की प्रक्रिया लंबी खिंच गई. हालांकि, गलत जानकारी जानबूझकर दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है.
थाना प्रभारी और समाजसेवी ने कराया अंतिम संस्कार
करीब दस दिनों तक पहचान और परिजनों की तलाश के बाद जामताड़ा थाना प्रभारी मनोज कुमार महतो ने मामले में पहल की.
उन्होंने चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एवं समाजसेवी संजय अग्रवाल से संपर्क कर लावारिस शव के अंतिम संस्कार में सहयोग मांगा. इसके बाद दोनों के प्रयास से अजय नदी स्थित श्मशान घाट पर युवक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया.
इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि युवक को अस्पताल पहुंचाने वाले लोग कहां चले गए और उसके परिजनों का पता क्यों नहीं चल सका. फिलहाल इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं.
पहले भी दो लावारिस शवों का कराया गया था अंतिम संस्कार
सदर अस्पताल में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले एक बुजुर्ग महिला और एक पुरुष का शव भी आठ दिनों से अधिक समय तक अस्पताल में पड़ा रहा था. बताया जाता है कि परिजनों से संपर्क करने के प्रयास के बावजूद कोई शव लेने नहीं पहुंचा. इसके बाद जामताड़ा थाना प्रभारी मनोज कुमार महतो और समाजसेवी संजय अग्रवाल के सहयोग से दोनों शवों का अंतिम संस्कार कराया गया था.
लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की चुनौती
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले मृतकों की पहचान, परिजनों तक पहुंचने और समय पर अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने की चुनौती को सामने लाते हैं. किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव को सम्मानजनक विदाई देना मानवीय संवेदना से जुड़ा विषय है.
जामताड़ा में थाना प्रभारी मनोज कुमार महतो और समाजसेवी संजय अग्रवाल की पहल से युवक का अंतिम संस्कार संभव हो सका.
अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने के लिए स्थायी व्यवस्था कैसे विकसित की जाए, ताकि किसी भी शव को लंबे समय तक अंतिम विदाई का इंतजार न करना पड़े.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

