जामताड़ा: राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के गृह जिले जामताड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं. आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को कर्मियों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया. झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ (सम्बद्ध-भारतीय मजदूर संघ) के बैनर तले कर्मियों ने सदर अस्पताल से समाहरणालय तक कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया. कर्मियों ने आरोप लगाया कि एक ओर एंबुलेंस की स्थिति जर्जर है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है.


मरीजों की जिंदगी से जुड़ी सेवा, लेकिन एंबुलेंस ही बीमार
प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने दावा किया कि जामताड़ा जिले में आधी से अधिक 108 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं. जो वाहन चल रहे हैं, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. उनका आरोप है कि विभाग या संबंधित एजेंसी की ओर से समय पर मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाते वक्त एंबुलेंस रास्ते में ही बंद हो जाती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि दुर्घटना, प्रसव पीड़ा या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाली सेवा खुद तकनीकी खामियों से जूझ रही है, तो आपातकाल में लोगों को कितनी राहत मिल पाएगी. स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में एंबुलेंस सेवा को लेकर उठ रहे इन सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, खराब एंबुलेंस की संख्या, मरम्मत की स्थिति और विभागीय कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक आंकड़े सामने आना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.
मांगें नहीं मानीं तो 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
संघ ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने की घोषणा की है. संघ के अध्यक्ष सुरेश रवानी ने कहा कि कर्मियों की मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं हुई, तो आंदोलन और व्यापक होगा. घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 12 अक्टूबर को सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष भिक्षाटन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. 14 अक्टूबर को उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन होगा, जबकि 16 अक्टूबर को पूरे झारखंड में एकदिवसीय पूर्ण हड़ताल की जाएगी.
संघ ने चेतावनी दी है कि 21 अक्टूबर तक सरकार और संबंधित विभाग ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो राज्यभर के 108 एंबुलेंस कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है.
सरकारी स्तर पर संचालन और बकाया अधिकारों की मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि 108 एंबुलेंस का संचालन सरकारी स्तर पर हो और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सिविल सर्जन के माध्यम से किया जाए. सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को संबंधित जिलों में दोबारा बहाल करने की भी मांग की गई है.इसके अलावा, कर्मियों ने ईपीएफ, ईएसआइसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन समेत सभी वैधानिक श्रमिक अधिकार उपलब्ध कराने की मांग उठाई है.संघ का कहना है कि एंबुलेंस सेवा में काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किए बिना व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना मुश्किल होगा.
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है. ऐसे में वाहनों की खराब स्थिति और कर्मचारियों का आंदोलन, दोनों ही आम लोगों की चिंता बढ़ाने वाले हैं. अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे एंबुलेंस की तकनीकी स्थिति की जांच, मरम्मत और कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं.यदि समय रहते समाधान नहीं निकला और प्रस्तावित हड़ताल हुई, तो सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों और परिजनों को उठानी पड़ सकती है, जिनके लिए आपातकाल में 108 एंबुलेंस ही अस्पताल पहुंचने का सबसे अहम सहारा है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

