जामताड़ा: जिले में सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला एक बार फिर सामने आया है. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत जामताड़ा जिले की सात महत्वपूर्ण सड़कों के मरम्मतीकरण की योजना वर्ष 2024 में ही तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति के चरण तक पहुंच चुकी थी. टेंडर प्रक्रिया भी पूरी होने की बात सामने आ रही है, लेकिन सड़क पर काम शुरू होने का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है.


यानी कागज पर सड़क तैयार होने की प्रक्रिया दौड़ती रही और जमीन पर सड़क गड्ढों में अटकी रही.
ग्रामीण कार्य विभाग के तहत कालाझरिया से नवाडीह भाया सलैया करीब 5 किलोमीटर, अमोई रेलवे ब्रिज से केलाही मोड़ 4.60 किलोमीटर, बंदाजोरी से भलगढ़ा 3.24 किलोमीटर, मिहिजाम से केवटजाली 1.80 किलोमीटर, चंपापुर से दिवान मोड़ 3.30 किलोमीटर, जामताड़ा एडीबी पथ के लखनपुर मोड़ से बोड़वा-पल्टा होते हुए सबनपुर तक 9.35 किलोमीटर तथा पतरोडीह पीडब्ल्यूडी पथ से सिकरपोसनी मोड़ तक करीब 2.30 किलोमीटर सड़क के मरम्मतीकरण का प्रस्ताव है.
इन सड़कों को एक पैकेज बनाकर एक ही एजेंसी से काम कराने की योजना बतायी गयी थी. विभागीय प्रक्रिया में तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं होना अब सवाल खड़े कर रहा है.
18 अगस्त 2024 का शिलान्यास, लेकिन सड़क आज भी वहीं की वहीं
सबसे दिलचस्प मामला अमोई रेलवे ब्रिज से केलाही मोड़ तक की 4.60 किलोमीटर सड़क का है। अगस्त 2024 में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने जामताड़ा में ग्रामीण कार्य विभाग की कई सड़कों की योजनाओं की घोषणा की थी. उस सूची में अमोई रेलवे ब्रिज से केलाही मोड़ तक की सड़क भी शामिल थी. स्थानीय स्तर पर इस सड़क के विशेष मरम्मतीकरण का शिलान्यास भी 18 अगस्त 2024 को किए जाने की बात कही जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि शिलान्यास के बाद सड़क पर काम कब शुरू होगा? शिलान्यास के समय विकास का पत्थर जमीन में गाड़ दिया गया, लेकिन उसके बाद शायद विकास की फाइल ही जमीन से उठकर कार्यालय की मेज पर जा बैठी. दो साल बीतने को हैं. सड़क वहीं है, गड्ढे वहीं हैं और राहगीरों की परेशानी भी वहीं है.
मुख्य अभियंता के फैसले का इंतजार कर रही सात सड़कें
ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं की तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी. संवेदकों ने टेंडर में भाग लिया और संबंधित दस्तावेज मुख्य अभियंता के स्तर पर पहुंचे. अब किस संवेदक को काम देना है, इसका निर्णय मुख्य अभियंता के स्तर से होना बताया जा रहा है. यहीं आकर विकास की गाड़ी ब्रेक लगा बैठी है. सवाल यह है कि जब योजना स्वीकृत है, प्राक्कलन तैयार है, तकनीकी प्रक्रिया पूरी है, वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है और संवेदक टेंडर प्रक्रिया में भाग ले चुके हैं, तो फिर वर्क एलोटमेंट के लिए आखिर कितने मौसम बदलने का इंतजार है? सरकारी फाइलों की अपनी रफ्तार होती है. लेकिन सड़क से गुजरने वाले ग्रामीणों को फाइल की रफ्तार से नहीं, सड़क की जरूरत होती है.
अफसरशाही की गति बनाम जनता की मजबूरी
जर्जर सड़क से गुजरते ग्रामीणों के लिए बारिश में कीचड़, गर्मी में धूल और हर मौसम में गड्ढे उनकी रोजमर्रा की समस्या बन चुके हैं. खराब सड़क का असर केवल आवागमन पर नहीं पड़ता, बल्कि स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार तक पहुंच भी प्रभावित होती है.
विडंबना यह है कि सड़क की मरम्मत के लिए सरकारी प्रक्रिया दो साल से चल रही है, लेकिन सड़क की हालत देखकर लगता है कि प्रक्रिया ने सड़क को पीछे छोड़ दिया है.अगर किसी योजना को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसके बाद भी काम शुरू नहीं होता, तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल उठना स्वाभाविक है.
विधायक का काम सिर्फ शिलान्यास तक या निगरानी भी?
स्थानीय विधायक और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अगस्त 2024 में जामताड़ा की कई सड़कों के विकास की योजनाओं को सामने रखा था। उस समय उन्होंने विकास को प्राथमिकता बताया था.
लेकिन जनप्रतिनिधित्व का सवाल केवल शिलान्यास के पत्थर तक सीमित नहीं होना चाहिए. शिलान्यास के बाद काम शुरू हुआ या नहीं, संवेदक को कार्यादेश मिला या नहीं, विभागीय फाइल कहां अटकी है और जनता को सड़क कब मिलेगी—इन सवालों की निगरानी भी उसी विकास प्रक्रिया का हिस्सा है.
जनता के लिए असली उद्घाटन तब होगा, जब सड़क पर मशीनें उतरेंगी, गड्ढे भरेंगे और आवागमन सुगम होगा. शिलान्यास का पत्थर तो राहगीर को गड्ढे से नहीं बचा सकता.
सवाल कई, जवाब एक भी नहीं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2024 में स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अक्टूबर 2026 तक काम क्यों नहीं शुरू हुआ?
– मुख्य अभियंता के स्तर पर वर्क एलोटमेंट क्यों लंबित है?
– टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हुई?
– सात सड़कों का पैकेज बनने के बावजूद कार्यादेश जारी क्यों नहीं हुआ?
– क्या विभाग ने लंबित प्रक्रिया की समयबद्ध समीक्षा की?
– और सबसे अहम—जनप्रतिनिधि द्वारा शिलान्यास के बाद योजना की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब विभाग और जनप्रतिनिधि, दोनों से अपेक्षित हैं. क्योंकि जनता को अब शिलान्यास नहीं, सड़क चाहिए। फाइलों में स्वीकृति नहीं, जमीन पर मरम्मत चाहिए. और भाषण में विकास नहीं, सड़क पर विकास दिखाई देना चाहिए.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

