सरायकेला/ जमशेदपुर: जिले में एक बार फिर इंडिया न्यूज़ वायरल बिहार-झारखंड की खबर का असर देखने को मिला है. सरायकेला-खरसावां जिले के फुफडीह गांव में जमीन से पानी के रिसाव, मकानों में दरार और क्रशर की ब्लास्टिंग से कथित नुकसान की खबर प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद मंगलवार को झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति की तीन सदस्यीय टीम क्षेत्र में पहुंची. समिति ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और क्रशर क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद तत्काल ब्लास्टिंग पर रोक लगाने का निर्देश दिया.


खास बात यह है कि संबंधित क्रशर सरायकेला-खरसावां जिले में नहीं, बल्कि पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में स्थित है. क्रशर सरायकेला-खरसावां जिले की सीमा से सटा हुआ है, जबकि इससे नुकसान होने का आरोप सीमा के दूसरी ओर बसे फुफडीह गांव के ग्रामीण लगा रहे हैं.

समिति में अध्यक्ष सह मझगांव विधायक निरल पूर्ति, बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव, मनोहरपुर विधायक जगत माझी सहित अन्य सदस्य शामिल थे. निरीक्षण के दौरान पूर्वी सिंहभूम के पोटका अंचल अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे. ग्रामीणों ने समिति के सामने आरोप लगाया कि क्रशर में होने वाली ब्लास्टिंग का असर फुफडीह गांव तक पहुंच रहा है. इससे मकानों में दरारें पड़ने के साथ जमीन से पानी का रिसाव हो रहा है और कई घरों में पानी घुस रहा है. ग्रामीणों ने क्रशर संचालन के लिए फर्जी ग्रामसभा किए जाने का भी आरोप लगाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

बताया जा रहा है कि क्रशर का संचालन नव निर्माण बिल्डर द्वारा किया जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि खनन के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. दूसरी ओर क्रशर संचालक का दावा है कि नियमानुसार ग्रामसभा कराई गई है. ऐसे में ग्रामीणों के आरोप और संचालक के दावे में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.

गौरतलब है कि इंडिया न्यूज़ वायरल बिहार-झारखंड ने फुफडीह के ग्रामीणों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था. खबर प्रकाशित होने के बाद अब विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया है. फिलहाल समिति के निर्देश पर ब्लास्टिंग रोक दी गई है.

देखें इंडिया न्यूज़ वायरल की खबर जिसमें गांव की समस्या को प्रमुखता से दिखाया गया 👇
अब देखना दिलचस्प होगा कि मामला केवल ब्लास्टिंग पर रोक तक सीमित रहता है या जांच का दायरा आगे बढ़ाकर खनन मानकों, ग्रामसभा की वैधता और क्रशर संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी गहराई से जांच की जाती है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि फुफडीह के ग्रामीणों को हो रहे नुकसान के पीछे ब्लास्टिंग की भूमिका सामने आती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी और प्रभावित ग्रामीणों को राहत कैसे मिलेगी.

