आदित्यपुर: आरआईटी थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 27 में सहारा गार्डन सिटी के समीप वर्षों से बसे परिवारों के आशियाने पर बुलडोजर चलने की आशंका के बीच सोमवार को बस्तीवासियों का गुस्सा फूट पड़ा. स्व. घासीराम के वंशजों द्वारा बनाए गए मकानों को तोड़े जाने की कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एकजुट हो गए और भाजपा नेता रंजन दास के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.


मकान टूटने की आशंका से सहमे लोगों ने रंजन दास पर भयादोहन और गरीब परिवारों पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं. रंजन दास को आदित्यपुर नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर और भाजपा नेता बॉबी सिंह का करीबी बताया जा रहा है.
बस्तीवासियों का आरोप है कि राजनीतिक पहुंच और प्रभाव के सहारे वर्षों से बसे मूलवासी परिवारों को हटाने की कोशिश की जा रही है.
महिलाओं का गंभीर आरोप- पहले हजारों लिए, अब एक लाख की मांग
इस विवाद में सबसे गंभीर आरोप बस्ती की महिलाओं ने लगाए हैं. उनका आरोप है कि पिछले वर्ष बस्ती के कई परिवारों से कथित तौर पर 10 हजार से 20 हजार रुपये तक लिए गए थे. इसके बाद करीब एक साल तक मामला शांत रहा. अब होली के बाद कथित तौर पर प्रत्येक परिवार से एक-एक लाख रुपये की मांग की गई. बस्तीवासियों का आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद मकान तोड़ने के लिए न्यायालय के आदेश का सहारा लिया जा रहा है. हालांकि पैसे के लेन-देन और मांग से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
आरटीआई बना हथियार या व्यवस्था सुधारने का माध्यम ?
लोगों ने उठाए सवाल
बस्तीवासियों ने रंजन दास पर आरटीआई के माध्यम से गरीब परिवारों पर लगातार दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है. लोगों का सवाल है कि यदि खाता संख्या 48 में करीब 1500 प्लॉट हैं और बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से वहां मकान बनाकर रह रहे हैं, तो कार्रवाई चुनिंदा मकानों को लेकर ही क्यों आगे बढ़ रही है ? लोगों का कहना है कि संबंधित जमीन गैरमजरुआ खास किस्म की है. ऐसे में प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पूरे भूखंड की वास्तविक स्थिति क्या है, कितने मकान बने हैं, किन मकानों के खिलाफ आदेश है और कार्रवाई का आधार क्या है.
‘पैसा दो या मकान टूटेगा?’ आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल
बस्तीवासियों के आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अतिक्रमण या जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा. सवाल यह भी उठेगा कि क्या गरीब परिवारों के सिर से छत छिनने के भय का इस्तेमाल कथित वसूली के लिए किया गया ? क्या न्यायालय और प्रशासनिक कार्रवाई का नाम लेकर लोगों पर आर्थिक दबाव बनाया गया ? और यदि लोगों से पहले भी रकम ली गई थी तो वह रकम किस आधार पर और किस उद्देश्य से ली गई ?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है.
बॉबी सिंह से करीबी को लेकर भी बस्ती में चर्चा
रंजन दास को पूर्व डिप्टी मेयर बॉबी सिंह का करीबी बताया जाता है. इसी कारण स्थानीय लोग पूरे मामले को राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि किसी नेता से राजनीतिक या व्यक्तिगत निकटता अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करती. बस्तीवासियों की मांग है कि प्रशासन किसी राजनीतिक दबाव से अलग होकर पूरे प्रकरण की जांच करे.
बुलडोजर से पहले आरोपों की जांच की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों का है जिनके सिर पर मकान टूटने का खतरा मंडरा रहा है. बस्तीवासियों ने साफ कर दिया है कि वे कार्रवाई का विरोध करेंगे. उनकी मांग है कि मकान तोड़ने से पहले जमीन से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच हो, प्रभावित परिवारों को सुना जाए और रंजन दास पर लगाए गए कथित वसूली तथा भयादोहन के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए.
फिलहाल वार्ड संख्या 27 में मामला केवल जमीन और मकान का नहीं रह गया है. गरीबों के आशियाने, कथित पैसे की मांग और राजनीतिक रसूख के आरोपों ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है. अब प्रशासन की कार्रवाई के साथ यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि बस्तीवासियों के गंभीर आरोपों की जांच होती है या बुलडोजर की कार्रवाई के बीच ये सवाल दबकर रह जाते हैं. इस मामले को लेकर भाजपा नेता रंजन दास और आदित्यपुर नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर बॉबी सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर दोनों ने ही फोन नहीं उठाया.

