सरायकेला: जिले की सड़कों पर होने वाले हादसों के लिए अक्सर भारी वाहनों और अनियंत्रित ड्राइविंग को जिम्मेदार ठहराया जाता है. ट्रक, ट्रेलर और दूसरे बड़े वाहनों पर कार्रवाई की मांग भी उठती रहती है. लेकिन हर दुर्घटना के खतरे के पीछे केवल भारी वाहन ही जिम्मेदार हों, यह मान लेना भी सही नहीं होगा. रविवार को चांडिल थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे-33 पर इंडिया न्यूज़ वायरल के कैमरे में कैद हुई तस्वीरों ने सड़क सुरक्षा का एक दूसरा और बेहद चिंताजनक चेहरा सामने रखा.


करीब दर्जनभर युवक मोटरसाइकिलों पर जिस तरह हाईवे पर हुड़दंग और जोखिम भरी ड्राइविंग करते नजर आए, उसने वहां से गुजर रहे दूसरे वाहन चालकों को भी सकते में डाल दिया. किसी के सिर पर हेलमेट नहीं था तो किसी को रफ्तार की परवाह नहीं दिखी. बाइक चलाने का अंदाज ऐसा था कि एक छोटी सी चूक न केवल इन युवकों बल्कि आसपास चल रहे दूसरे वाहन चालकों के लिए भी बड़े हादसे की वजह बन सकती थी.
सड़क को समझ लिया स्टंट का मैदान, जोखिम दूसरों की जिंदगी का भी
NH-33 कोई खाली मैदान या स्टंट ट्रैक नहीं है. यह झारखंड के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां हर समय भारी वाहन, बसें, कार और दोपहिया वाहन चलते हैं. ऐसी सड़क पर तेज रफ्तार में समूह बनाकर जोखिम भरी बाइक चलाना केवल अपनी जिंदगी को खतरे में डालना नहीं है. अचानक बाइक अनियंत्रित होने या दूसरे वाहन के सामने आने की स्थिति में निर्दोष राहगीर भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं.

रविवार को जो दृश्य कैमरे में कैद हुआ, उसमें जरा सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी. तस्वीरें रिकॉर्ड कर रहे लोगों के लिए भी युवकों की हरकतें चिंता पैदा करने वाली थीं.
कुछ बाइक के नंबर कैमरे में कैद, अब पुलिस के सामने चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम में कुछ मोटरसाइकिलों के रजिस्ट्रेशन नंबर भी कैमरे में कैद हुए हैं. इससे पुलिस और परिवहन विभाग के लिए संबंधित वाहनों की पहचान करना संभव हो सकता है. अब सवाल है कि क्या पुलिस वायरल वीडियो और उपलब्ध नंबरों का सत्यापन कर संबंधित वाहन चालकों की पहचान करेगी ? कार्रवाई केवल चालान तक सीमित रहे या कानून के अनुसार अन्य कदम भी उठें, यह जांच और उल्लंघन की प्रकृति पर निर्भर करेगा. लेकिन ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है.
हादसा होने के बाद ही क्यों जागे व्यवस्था ?
सड़क हादसे के बाद अक्सर पुलिस पहुंचती है. वाहन जब्त होता है. जांच होती है. मृतक या घायल के परिवार के लिए मुआवजे की मांग उठती है. लेकिन सड़क सुरक्षा का असली उद्देश्य हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि हादसे को होने से रोकना है. अगर NH-33 पर इस तरह समूह में बाइक दौड़ाने और यातायात नियमों की अनदेखी करने की घटनाएं हो रही हैं तो पुलिस को ऐसे स्थानों और समय की पहचान कर विशेष जांच अभियान चलाने की जरूरत है.
भारी वाहनों पर सवाल जरूर, लेकिन बाइकर्स को नियम तोड़ने की छूट क्यों ?
NH-33 पर दुर्घटना होते ही पहला सवाल अक्सर भारी वाहनों की रफ्तार और परिचालन पर उठता है. जहां उनकी गलती हो वहां कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए. लेकिन सड़क सुरक्षा का नियम सभी के लिए समान है. बिना हेलमेट तेज रफ्तार बाइक चलाना, समूह में सड़क पर हुड़दंग करना या ऐसी ड्राइविंग करना जिससे दूसरे वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़े, उसे केवल युवाओं की मौज-मस्ती कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सड़क पर अधिकार सभी का है, लेकिन किसी को दूसरे की जिंदगी खतरे में डालने का अधिकार नहीं है. रविवार की तस्वीरें चांडिल पुलिस और परिवहन विभाग के लिए एक सूचना भी हैं और चेतावनी भी. बाइक के नंबर कैमरे में हैं. वीडियो मौजूद है. अब जरूरत उसकी जांच और समय रहते प्रभावी कार्रवाई की है. क्योंकि अगली बार कैमरे में केवल स्टंट की तस्वीर नहीं, किसी बड़े हादसे की तस्वीर भी कैद हो सकती है.
बाइक नंबर JH05CR-8749, JH05BS-4624 और JH05DG-5046 कैमरे में कैद.
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