जामताड़ा: चलते- चलते ई-बाइक का पिछला चक्का टूटकर अलग हो जाने का मामला सामने आने के बाद जामताड़ा परिवहन विभाग सक्रिय हो गया है. इलेक्ट्रिक वाहन की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जिला परिवहन पदाधिकारी मुकेश कुमार ने मोटर वाहन निरीक्षक को तकनीकी जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. DTO के अनुसार MVI की तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.


इंडिया न्यूज़ वायरल बिहार-झारखंड ने “ई-बाइक का पिछला चक्का चलते-चलते टूटा, कंपनी-डीलर पर कार्रवाई की मांग” शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए वाहन की तकनीकी गुणवत्ता, रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मानकों की जांच का मुद्दा उठाया था. अब परिवहन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ई-बाइक में किसी प्रकार की तकनीकी खामी थी या घटना के पीछे कोई अन्य कारण था.
चलती ई-बाइक से अलग हो गया था पिछला चक्का
मामला कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के हेठ कर्माटांड़ निवासी अशोक कुमार मंडल की JVK Gamma ई-बाइक से जुड़ा है. अशोक कुमार मंडल के अनुसार वह समतल सड़क पर ई-बाइक चला रहे थे, तभी अचानक उसका पिछला चक्का टूटकर वाहन से अलग हो गया. घटना इतनी अचानक हुई कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. हालांकि हादसे में वह बाल-बाल बच गए.
पीड़ित के मुताबिक उन्होंने ई-बाइक कर्माटांड़ स्थित बाबा ई-व्हीकल शोरूम से खरीदी थी. उनका दावा है कि घटना के समय सड़क पर कोई बड़ा गड्ढा नहीं था और वाहन को किसी तरह का जोरदार झटका भी नहीं लगा था. घटना के बाद वाहन बंद हो गया और उसे धक्का देकर घर तक ले जाना पड़ा.
अशोक कुमार मंडल का आरोप है कि वाहन में इससे पहले भी छोटी-बड़ी खराबियां आती रही हैं और शिकायत के बावजूद कंपनी एवं शोरूम प्रबंधन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और तकनीकी जांच के बाद ही खराबी की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.
70 किमी की रफ्तार का दावा, नंबर प्लेट और रजिस्ट्रेशन की भी होगी पड़ताल
इस मामले में वाहन की अधिकतम गति और वैध पंजीकरण को लेकर भी सवाल उठे हैं. पीड़ित का दावा है कि संबंधित JVK Gamma ई-बाइक करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से चलती है, लेकिन उन्हें वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और नंबर प्लेट उपलब्ध नहीं कराया गया.
अब जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मॉडल किस वाहन श्रेणी में आता है, उसकी मोटर क्षमता और निर्माता द्वारा निर्धारित अधिकतम गति कितनी है. साथ ही वाहन के टाइप अप्रूवल, रजिस्ट्रेशन एवं बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति क्या है. पीड़ित द्वारा बताई गई गति और रजिस्ट्रेशन संबंधी दावों की पुष्टि भी विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी.
कुछ दिन पहले खड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटी में लगी थी आग
जिले में ई-वाहन को लेकर चिंता बढ़ाने वाला यह अकेला मामला नहीं है. कुछ दिन पहले जामताड़ा-मिहिजाम मुख्य मार्ग पर श्याम मंदिर के समीप मोहन नामक व्यक्ति के घर में खड़ी एक इलेक्ट्रिक स्कूटी में आग लगने की घटना सामने आई थी. आग में स्कूटी जल गई थी.
ऐसी घटनाओं के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सुरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता, बिक्री के बाद मिलने वाली सेवा और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि दोनों घटनाओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और किसी व्यापक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए तकनीकी जांच जरूरी है.
हादसे बढ़े तो ई-वाहनों से तौबा करने लगे लोग
इलेक्ट्रिक वाहनों को पर्यावरण अनुकूल और कम खर्च वाला विकल्प बताया जा रहा है, लेकिन यदि सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों की तकनीकी गुणवत्ता ही सवालों के घेरे में आ जाए तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन जाती है. चक्का टूटने, अचानक आग लगने अथवा तकनीकी खराबी के कारण वाहन के नियंत्रण से बाहर होने जैसी घटनाएं सीधे चालक और आसपास के लोगों की जान को खतरे में डाल सकती हैं. जिले में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के कारण कई लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले अब उसकी सुरक्षा, प्रमाणन, रजिस्ट्रेशन और कंपनी की सर्विस व्यवस्था को लेकर गंभीरता से सोचने लगे हैं.
अब MVI की रिपोर्ट पर टिकी नजर
परिवहन विभाग के सक्रिय होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण MVI की तकनीकी रिपोर्ट होगी. जांच से यह पता चल सकेगा कि ई-बाइक के पिछले पहिये के अलग होने का कारण क्या था और वाहन निर्धारित तकनीकी एवं वैधानिक मानकों के अनुरूप था या नहीं. यदि जांच में तकनीकी खामी, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन अथवा रजिस्ट्रेशन संबंधी अनियमितता की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई तय की जा सकेगी. फिलहाल कंपनी या संबंधित डीलर की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

