सरायकेला: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर गुरुवार को चांडिल नौका विहार परिसर में चांडिल डैम विस्थापितों ने एक दिवसीय उपवास किया. विस्थापित मुक्ति वाहिनी एवं विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से वर्षों पुरानी भूमि और पुनर्वास संबंधी समस्याओं के शांतिपूर्ण एवं न्यायपूर्ण समाधान की मांग की गई.


संगठनों ने कहा कि गांधी के सत्य, अहिंसा, शांति और सद्भाव के रास्ते पर चलते हुए विस्थापित अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे.
काटिया पुनर्वास स्थल पर चार दिनों से तनाव का दावा
संगठनों के अनुसार चांडिल प्रखंड के रूदिया पंचायत अंतर्गत काटिया पुनर्वास स्थल पर पिछले चार दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है. आरोप है कि विस्थापित परिवारों को तालाब में स्नान करने, रास्ते से आवागमन करने और खुले मैदान में गाय-बकरी चराने से कथित रूप से रोका जा रहा है. विस्थापितों के प्लॉट में लगे पेड़ों को काटे जाने का भी आरोप लगाया गया है.
हालांकि इन आरोपों पर दूसरे पक्ष और प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है.
मामले को लेकर दोनों संगठनों ने चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी सह विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, सुवर्णरेखा परियोजना को लिखित आवेदन देकर तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
0.725 एकड़ भूमि समेत पूरे पुनर्वास स्थल की जांच की मांग
विस्थापित संगठनों ने प्रशासन से काटिया पुनर्वास स्थल का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है. साथ ही शेष 0.725 एकड़ भूमि सहित पूरे पुनर्वास स्थल की वास्तविक स्थिति और अभिलेखों की जांच तथा विस्थापित परिवारों के आवागमन, दैनिक उपयोग एवं पुनर्वास भूमि से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है.
6 अक्टूबर तक समाधान नहीं तो 7 को धरना
एसडीएम को दिए आवेदन में संगठनों ने कहा है कि यदि 6 अक्टूबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 7 अक्टूबर 2026 को पुनर्वास कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा. संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है. वे प्रशासन से संवाद, निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण समाधान चाहते हैं.
उपवास में नारायण गोप, राकेश रंजन महतो, अंबिका यादव, श्यामल मार्डी, अक्लू धीवर, कार्तिक महतो, दामन बास्के, जगन्नाथ किस्कू, बिरबल प्रमाणिक, लखन माझी, सूरज मुर्मू, देवेन महतो, विजय टुडू, ठाकुरदास गोप, ईश्वर गोप, भागीरथ लायक, राजीव महतो, वैधनाथ महतो, उपवन गोप, मुखिया कुनाराम माझी तथा कुनाराम सोरेन (मास्टर) सहित बड़ी संख्या में विस्थापित मौजूद रहे.

