जामताड़ा: समन्वित बाल विकास सेवा (ICDS) के 51 वर्ष पूरे होने पर झारखंड राज्य आंगनवाड़ी सेविका- सहायिका यूनियन (CITU) ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. शुक्रवार को जामताड़ा स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यूनियन नेताओं ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और माताओं तक अनेक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन इन्हें धरातल पर लागू करने वाली सेविका- सहायिकाओं के अधिकार, मानदेय और सामाजिक सुरक्षा को उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया गया.


गौरतलब है कि ICDS की शुरुआत 2 अक्टूबर 1975 को हुई थी. इस लिहाज से योजना ने 2 अक्टूबर 2026 को 51 वर्ष पूरे कर 52वें वर्ष में प्रवेश किया है. सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले में भी ICDS की शुरुआत की यही तारीख दर्ज है.
यूनियन की महासचिव मीनू मुर्मू ने कहा कि बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से लेकर गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से जुड़े कार्यों तक आंगनवाड़ी कर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ी है. पोषण ट्रैकर, ई-केवाईसी, आधार आधारित प्रक्रिया और ऑनलाइन डाटा अपलोड जैसे डिजिटल कार्य भी अब उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा बन गए हैं.
काम बढ़ा, सुविधाएं नहीं: यूनियन
CITU नेताओं ने कहा कि गांवों में बच्चों का वजन, पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं की जानकारी, टीकाकरण में समन्वय, विभिन्न सर्वेक्षण और ऑनलाइन डाटा अपलोड तक कई जिम्मेदारियां सेविका- सहायिकाएं निभा रही हैं. इसके बावजूद नियमित कर्मचारी का दर्जा, सम्मानजनक मानदेय और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा की उनकी मांगें बनी हुई हैं.
यूनियन ने आरोप लगाया कि विभिन्न कार्यक्रमों में फल- सब्जी, सजावट और दूसरी गतिविधियों पर कर्मियों को अपनी जेब से भी खर्च करना पड़ता है. नेताओं ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों का खर्च सरकार को उठाना चाहिए, न कि कम मानदेय पर काम करने वाली सेविका- सहायिकाओं को.
ग्रेच्युटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उठाया मुद्दा
यूनियन ने 25 अप्रैल 2022 के सुप्रीम कोर्ट के Maniben Maganbhai Bhariya बनाम District Development Officer, Dahod फैसले का भी उल्लेख किया. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं Payment of Gratuity Act, 1972 के तहत ग्रेच्युटी की हकदार हैं.
यूनियन ने इस फैसले को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की. गौरतलब है कि फैसले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ने आंगनवाड़ी कर्मियों की कामकाजी परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई थी.
डिजिटल काम के साथ संसाधन भी देने की मांग
नई शिक्षा नीति और बढ़ते डिजिटल कार्यों को लेकर भी यूनियन ने सवाल उठाए. नेताओं ने कहा कि तीन से छह वर्ष के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, एजुकेटर, तकनीकी संसाधन और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए. केवल जिम्मेदारियां बढ़ाने से गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित नहीं हो सकती.
राज्य कोषाध्यक्ष लखन लाल मंडल, राज्य उपाध्यक्ष प्रीति कुमारी हांसदा और राज्य कमेटी सदस्य ममता टुडू ने कहा कि ICDS बच्चों और माताओं के पोषण एवं स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा कार्यक्रम है. इसलिए इसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत करने की जरूरत है.
यूनियन ने सेविका- सहायिकाओं को सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा देने, ग्रेच्युटी संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने, आंगनवाड़ी केंद्रों में भवन, पानी, बिजली और गैस जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने तथा गैर-जरूरी अतिरिक्त और डिजिटल कार्यभार कम करने की मांग की. CITU नेताओं ने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों से जुड़ा सवाल केवल उनके रोजगार का नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

