सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले में पिछड़ा वर्ग के हजारों छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं होने से उनकी पढ़ाई पर आर्थिक संकट गहराने लगा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति अब तक लंबित है. पर्याप्त सरकारी आवंटन नहीं मिलने के कारण बीएड, आईटीआई और जीएनएम जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे करीब 3,300 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का इंतजार करना पड़ रहा है.


56 करोड़ की जरूरत, आवंटन महज चार करोड़
जिले में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को दोनों वित्तीय वर्षों की छात्रवृत्ति का भुगतान करने के लिए करीब 56 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है. इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार की ओर से महज चार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. आवश्यकता की तुलना में आवंटन काफी कम होने के कारण छात्रवृत्ति भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
बताया गया है कि जिले में बीएड के करीब 1,500, आईटीआई के 1,000 और जीएनएम के करीब 800 छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति से वंचित हैं. छात्रवृत्ति नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों को कॉलेज फीस, पाठ्यक्रम से संबंधित सामग्री और अन्य शैक्षणिक खर्चों का वहन करने में परेशानी हो रही है.
आवंटन के अभाव में शिक्षा पर आर्थिक संकट
कल्याण विभाग की ओर से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. बीएड, जीएनएम, आईटीआई सहित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित प्रावधान के तहत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है. हालांकि, लगातार दो वित्तीय वर्षों से पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहायता होती है. ऐसे में लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है. विद्यार्थियों का कहना है कि समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलने से पढ़ाई से जुड़े खर्चों का अतिरिक्त बोझ परिवारों पर पड़ रहा है.
ओबीसी छात्रों के साथ दोहरा मापदंड अपना रही सरकार. हेमंत केशरी
भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री हेमंत केशरी ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के लिए पर्याप्त राशि का आवंटन नहीं होने पर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य वर्गों के लिए प्रत्येक वर्ष छात्रवृत्ति का आवंटन किया जा रहा है, जबकि ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को पिछले दो वर्षों से पर्याप्त आवंटन नहीं मिल रहा है. इससे हजारों छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित हो रही है.
हेमंत केशरी ने कहा कि छात्रवृत्ति सरकार की कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा को जारी रखने में महत्वपूर्ण सहायता है. उन्होंने राज्य सरकार से अविलंब पर्याप्त राशि आवंटित कर वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए. सरकार को विद्यार्थियों की समस्या का समाधान करते हुए लंबित छात्रवृत्ति के भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी करनी चाहिए.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दो वित्तीय वर्षों की छात्रवृत्ति के लिए करीब 56 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है, तो महज चार करोड़ रुपये के आवंटन से हजारों विद्यार्थियों को राहत कैसे मिलेगी. लंबित छात्रवृत्ति के भुगतान को लेकर स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आने से विद्यार्थियों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है.
प्रमोद सिंह: संपादक

