आदित्यपुर: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर हाउसिंग सोसायटी का मुख्य गेट और कार्यालय बनाए जाने के मामले में प्रशासन ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की. अनुमंडल दंडाधिकारी, सरायकेला के निर्देश पर मौजा आसंगी स्थित सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया गया. यह कार्रवाई बिल्डर संजय कुमार मोहंती की हाउसिंग सोसायटी प्रियदर्शनी होम्स से संबंधित बताई जा रही है.


मामला मौजा आसंगी, थाना संख्या-131, खाता संख्या-343, खेसरा संख्या-488 और रकवा 38 डी की बुलान भूमि से जुड़ा है. आरोप था कि उक्त सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर प्रियदर्शनी होम्स का मुख्य प्रवेश द्वार और कार्यालय बना दिया गया था. सरकारी जमीन को सोसायटी के रास्ते के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और आम लोगों के आवागमन में बाधा उत्पन्न करने की भी शिकायत की गई थी.
मापी में अतिक्रमण की हुई पुष्टि
मामले में संजय प्रधान की शिकायत पर झारखंड लोक भूमि अतिक्रमण (जेपीएलई) वाद दर्ज किया गया था. इसके बाद अंचल कार्यालय, गम्हरिया की ओर से जमीन की मापी कराई गई. जांच के दौरान सरकारी बुलान भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मामला अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय तक पहुंचा.

अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में दायर विविध वाद संख्या-105/2025 में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-152 के तहत आदेश पारित किया गया. आदेश के अनुसार पुलिस बल की मौजूदगी में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आलोक में गुरुवार को प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई. जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि सरकारी बुलान भूमि को घेरकर प्रियदर्शनी होम्स के प्रवेश मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था.
सरकारी रास्ते पर गेट लगाने का भी आरोप
स्थानीय रैयतदार अर्जुन प्रधान ने आरोप लगाया कि सरकारी रास्ते पर गेट लगाए जाने के कारण उनके परिवार के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. उनका आरोप है कि विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई और मारपीट की धमकी भी दी गई.
पहले भी विवादों में रहा है नाम
बिल्डर संजय मोहंती का नाम पूर्व में भी विवादों में रहा है. वर्ष 2020 में आदित्यपुर थाना क्षेत्र के मंगलम सिटी के समीप अपनी ही स्कॉर्पियो पर गोली चलवाकर संजय प्रधान और अशोक प्रधान को फंसाने की साजिश रचने का आरोप उस पर लगा था. तत्कालीन एसडीपीओ राकेश रंजन के नेतृत्व में हुई जांच में मामले का खुलासा होने के बाद संजय मोहंती समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. जांच के दौरान फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की खरीद-बिक्री किए जाने के आरोप भी सामने आए थे. उस समय उस पर सरकारी जमीन की बिक्री और लोगों को कथित तौर पर फर्जी तरीके से जमीन का पोजेशन दिलाने के आरोप लगाए गए थे.
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन बेचने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि संजय मोहंती ने अर्जुन प्रधान और संजय प्रधान की जमीन से संबंधित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर सरकारी भूमि तक बेचने का प्रयास किया. आरोप है कि विरोध करने पर पीड़ित परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई. फिलहाल एसडीओ के आदेश पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया है. मामले में सामने आए अन्य आरोपों की वास्तविकता संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में जमीन से जुड़े विवादों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है.

