सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. रेलवे टिकट काउंटर जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर करीब 24 घंटे से बिजली गुल थी. बिजली विभाग को सूचना देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिससे टिकट लेने पहुंचे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.


मामले की जानकारी जब सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी को मिली तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल रेलवे टिकट काउंटर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने संबंधित बिजली विभाग को मामले की जानकारी दी. इसके बाद विभाग के मिस्त्री मौके पर पहुंचे और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया.
बिजली बहाल होने के बाद रेलवे टिकट काउंटर का काम दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सका. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. लोगों का सवाल है कि जिस खराबी को विभाग 24 घंटे में ठीक नहीं कर सका, वह जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद इतनी जल्दी कैसे ठीक हो गई.
लोगों का कहना है कि रेलवे टिकट काउंटर जैसी सार्वजनिक सुविधा वाली जगह पर बिजली खराब होने के बाद भी विभाग की ओर से तत्परता नहीं दिखाई गई. ऐसे में आम उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में कितना समय लगता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि रेलवे टिकट काउंटर पर लंबे समय से बिजली नहीं रहने के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही थी. सूचना मिलते ही वे स्वयं मौके पर पहुंचे और संबंधित विभाग को तत्काल जानकारी दी, जिसके बाद बिजली व्यवस्था बहाल हुई.
उन्होंने कहा कि जनता किसी सुविधा के लिए घंटों परेशान हो और शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो, यह व्यवस्था की गंभीर कमी है. रेलवे टिकट काउंटर जैसी जगह पर बिजली की समस्या को 24 घंटे तक लंबित रखना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है.
मनोज चौधरी ने कहा कि बिजली विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा और शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी. उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से व्यवस्था बेहतर करने और नियमित रखरखाव के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति कई बार इसके विपरीत नजर आती है.
उन्होंने कहा कि रखरखाव के नाम पर घंटों बिजली काटी जाती है, लेकिन इसके बावजूद खराबी आने पर समय पर सुधार नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है.
सरायकेला में बिजली की आंख-मिचौली और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों को लेकर उपभोक्ताओं में पहले से नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई बार समस्या के समाधान में काफी समय लग जाता है.
रेलवे टिकट काउंटर की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सार्वजनिक महत्व के केंद्र पर 24 घंटे तक बिजली की समस्या का समाधान नहीं हो सकता, तो आम उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर आखिर किसके भरोसे रहे.
अब देखना यह होगा कि रेलवे टिकट काउंटर की यह घटना बिजली विभाग के लिए सिर्फ एक दिन की कार्रवाई बनकर रह जाती है या इसके बाद बिजली व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली में वास्तव में सुधार होता है.
संपादक: प्रमोद सिंह

