मुंबई. टाटा समूह से जुड़ी बड़ी कॉरपोरेट खबर सामने आई है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. हालांकि वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. इसके बाद वह पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे. यह घटनाक्रम 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक से ठीक पहले सामने आया है.


चंद्रशेखरन का टाटा संस के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल फरवरी 2017 में शुरू हुआ था. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने तकनीक, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमानन और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए. अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर टाटा समूह के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है.
पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी थी अनिश्चितता
चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर पिछले कुछ महीनों से अनिश्चितता बनी हुई थी. फरवरी में टाटा संस बोर्ड ने उनके पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया था. रिपोर्टों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन, पूंजी के इस्तेमाल और रणनीतिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे.
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था. 18 अगस्त की AGM में उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति को लेकर मतदान प्रस्तावित था. निदेशक के रूप में बने रहना उनके चेयरमैन पद पर बने रहने के लिए भी महत्वपूर्ण था.
नए कारोबारों के प्रदर्शन पर उठे थे सवाल
टाटा समूह ने पिछले कुछ वर्षों में कई नए और रणनीतिक क्षेत्रों में भारी निवेश किया है. इनमें एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा डिजिटल और अन्य नए कारोबार शामिल हैं. कुछ नए कारोबारों में बढ़ते घाटे को लेकर भी समूह के भीतर सवाल उठे थे. यही वजह रही कि चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर बोर्ड स्तर पर चर्चा लंबी खिंची.
हालांकि टाटा समूह की कई पारंपरिक कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है. ऐसे में चंद्रशेखरन के नेतृत्व को लेकर चर्चा केवल उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टाटा समूह की भविष्य की कारोबारी रणनीति और नए निवेशों की दिशा से भी जुड़ी हुई है.
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच संबंधों को लेकर सामने आई चर्चाएं हैं. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी है और ऐसे में चेयरमैन की नियुक्ति में ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
रिपोर्टों के अनुसार चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को लेकर फरवरी की बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद और संवादहीनता की स्थिति बनी थी.
विजय सिंह के इस्तीफे ने भी बढ़ाई हलचल
इसी बीच टाटा ट्रस्ट्स के उपाध्यक्ष विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है. विजय सिंह दिवंगत रतन टाटा के भरोसेमंद लोगों में गिने जाते रहे हैं. उनके इस्तीफे और चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले के एक साथ सामने आने से टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल. अगला चेयरमैन कौन ?
चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 तक पद पर बने रहने के बाद टाटा संस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए चेयरमैन के चयन की होगी. यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा समूह वर्तमान समय में कई बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है. एयर इंडिया का एकीकरण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार, नई तकनीक में निवेश और वैश्विक बाजार में टाटा समूह की प्रतिस्पर्धा. इन सभी क्षेत्रों की दिशा नए नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगी. चंद्रशेखरन के इस्तीफे को तत्काल नेतृत्व संकट के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे. लेकिन यह साफ है कि टाटा समूह अब एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी में प्रवेश कर चुका है.

