आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित कुलुपटांगा फीडर में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था आखिरकार अब बड़े सवालों के घेरे में आ गई है. शुक्रवार को आंधी- बारिश के बाद करीब 20 घंटे तक बिजली गुल रहने से हजारों उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा. भीषण गर्मी, पानी संकट और अंधेरे से परेशान लोगों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे लापरवाही और बदहाल सिस्टम का परिणाम बताया. अब बढ़ते जनदबाव के बीच विभाग भी हरकत में आया है और स्थायी समाधान का दावा किया जा रहा है.

इस गंभीर समस्या को लेकर “आदित्यपुर गम्हरिया विकास समिति” का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जमशेदपुर विद्युत एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक अजीत कुमार से मिला. नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं समिति अध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कुलुपटांगा फीडर की जर्जर स्थिति, बार- बार होने वाले ब्रेकडाउन और घंटों बिजली कटौती का मुद्दा मजबूती से उठाया. प्रतिनिधिमंडल में कुमार बिपिन बिहारी और संतोष सिंह यादव भी शामिल थे.
बैठक के दौरान पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि कुलुपटांगा फीडर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह घरेलू उपभोक्ताओं का फीडर होने के कारण विभाग की प्राथमिकता में नहीं रहा, जबकि यहां हजारों परिवार बिजली संकट झेल रहे हैं. उन्होंने मांग की कि बार-बार पोल गिरने और तार टूटने की समस्या से बचने के लिए 11 केवी लाइन को अंडरग्राउंड किया जाए.
बताया गया कि हालिया आंधी- पानी में NIT के समीप दो पोल गिर गए थे और पेड़ की बड़ी टहनियां तारों पर गिरने से पूरा फीडर ठप हो गया था. विभागीय कर्मचारी पूरी रात मरम्मत कार्य में जुटे रहे, लेकिन घंटों तक बिजली बहाल नहीं हो सकी. इस दौरान लोगों के घरों में लगे इन्वर्टर जवाब दे गए, पानी की सप्लाई बंद हो गई और बच्चे, बुजुर्ग व मरीज सबसे अधिक परेशान रहे.
बिजली संकट को लेकर उपभोक्ताओं का आक्रोश अब केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि विभाग हर दिन मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काटता है, लेकिन जमीन पर व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही. क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि आखिर करोड़ों रुपये के आधुनिकीकरण और रखरखाव के दावों के बावजूद सिस्टम इतना कमजोर क्यों है. कई उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग में मेंटेनेंस और आधुनिकीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार की आशंका तक जता दी है.
हालांकि अब विभाग ने स्थिति सुधारने का भरोसा दिया है. जीएम अजीत कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि अगले सप्ताह से कुलुपटांगा फीडर में व्यापक सर्वे और मेंटेनेंस कार्य शुरू किया जाएगा. उन्होंने बताया कि फीडर को छोटा करने और लोड संतुलन सुधारने के लिए करीब 2 किलोमीटर अंडरग्राउंड केबल, नया 11 केवी ब्रेकर और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे.
इसके अलावा अब 200 किलोग्राम क्षमता वाले पुराने पोल की जगह 400 किलोग्राम क्षमता वाले मजबूत पोल लगाए जाएंगे, ताकि आंधी- पानी में पोल गिरने की घटनाओं पर रोक लग सके. फीडर के आसपास पेड़ों की टहनियों की छंटाई, खराब इंसुलेटर बदलने और बड़े स्तर पर तकनीकी सुधार का भी दावा किया गया है.
इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा. लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखा तो जनआक्रोश और बढ़ सकता है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग बिल वसूली में तो पूरी सख्ती दिखाता है, लेकिन सुविधाएं देने और आपात स्थिति से निपटने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है.
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि छोटे-मोटे कामों को बड़ी उपलब्धि बताकर प्रचार तो खूब किया जाता है, लेकिन वर्षों से जमीनी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं. अब जनता स्थायी समाधान चाहती है, केवल बयानबाजी नहीं.



