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जामताड़ा: शहर के भगवाना टावर में सखी सहेली ग्रुप द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम “नानी बाई का मायरा” का शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हो गया. कार्यक्रम के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्ति रस में सराबोर नजर आया.
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कथा के दौरान राजस्थान से पधारे आचार्य उमेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता के जीवन चरित्र का मार्मिक वर्णन किया. उन्होंने कथा के माध्यम से भक्ति, विश्वास, त्याग और भगवान की कृपा का भावपूर्ण चित्रण किया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.
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आचार्य श्री ने बताया कि भक्त नरसी मेहता कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर भक्ति से कभी विचलित नहीं हुए. गांव के बाहर टूटी-फूटी झोपड़ी में जीवन बिताने के बावजूद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण पर अपना अटूट विश्वास बनाए रखा. कथा में नानी बाई और उनके मायरे का प्रसंग सुनाते हुए बेटी की पीड़ा, समाज के ताने और पिता के अटूट भरोसे को बेहद भावुक अंदाज में प्रस्तुत किया गया.
कथा के अनुसार नानी बाई ने अपने पिता से मायरा लेकर न आने की बात कही थी, लेकिन भक्त नरसी मेहता ने विश्वास जताया कि उनका सांवरिया सेठ स्वयं मायरा लेकर आएगा. जब दुखी नानी बाई सरोवर पहुंचकर भगवान कन्हैया को पुकारती हैं, तब भगवान स्वयं प्रकट होकर उन्हें आश्वस्त करते हैं. बाद में भगवान सांवरिया सेठ के रूप में आकर भक्त की लाज बचाते हुए 56 करोड़ का मायरा भरते हैं.
कार्यक्रम में इस दिव्य प्रसंग की भव्य झांकी भी प्रस्तुत की गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही. झांकी में भगवान श्रीकृष्ण के सांवरिया सेठ रूप और मायरे के दृश्य को बेहद सुंदर तरीके से सजाया गया था. श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ झांकी का दर्शन किया और इसे अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताया. इस अवसर पर आयोजनकर्ता सखी सहेली ग्रुप की 15वीं वर्षगांठ भी मनाई गई. संस्था की महिलाओं ने केक काटकर सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में समूह की यात्रा को याद किया. कार्यक्रम में महिलाओं और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था.
समापन अवसर पर विधिवत हवन-पूजन का आयोजन किया गया. इसके बाद विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. पूरे आयोजन के दौरान भजन, कथा और आध्यात्मिक वातावरण से भगवाना टावर परिसर भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं.