सरायकेला: जिले के कपाली से आए आदिवासी- मूलवासी समाज के दर्जनों लोगों ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन से मुलाकात की और कहा कपाली पंचायत में कभी डांगरडीह, बांधगोड़ा, हांसाडूंगरी, केन्दडीह और कालियाडूंगरी जैसे गांव शामिल थे. सन 1995 की वोटर लिस्ट के अनुसार यहां केवल आदिवासी- मूलवासी समाज के ही वोटर थे, जैसे मांझी, टुडू, महतो, मंडल और कुंभकार. पिछले कुछ वर्षों में उन्हीं लोगों की जमीनें हड़पकर कुछ बाहरी लोगों को बसाया गया.

आज आदिवासी- मूलवासी समाज के डेढ़- दो हजार वोटर बचे हैं, जबकि 35,000 से अधिक वोटर एक अन्य समुदाय के हैं. विस्थापित आदिवासी लोगों के पास खतियान और सभी दस्तावेज हैं, लेकिन सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर उनकी जमीनें हथिया ली गईं. समाज के लोग सवाल कर रहे हैं कि राज्य सरकार किसके संरक्षण में यह गोरखधंधा चल रहा है और वोट बैंक के लिए बाहरी लोगों को किसने बसाया है. कई टोलों को रिकॉर्ड्स से गायब किया गया है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा जिला प्रशासन और चुनाव आयोग अगर ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तो जनता दरबार लगाकर सभी खतियान और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे और आगे की आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी.

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