जमशेदपुर/ Afroz Mallik दिल्ली के महरौली स्थित हज़रत कुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह शरीफ से 9 दिसंबर को बाद नमाज़-ए-ज़ोहर दोपहर 1:30 बजे छड़ी यानी परचम की रवानगी होगी. इसकी जानकारी डिस्को बाबा चौकी से सैय्यद अब्दुल रहीम कुतुबी उर्फ गुड्डू मियां ने दी.

उन्होंने बताया कि अजमेर शरीफ में हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह का 814वां उर्स मुबारक 24 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जिसमें शामिल होने के लिए देशभर से हजारों जायरीन महरौली पहुंच रहे हैं. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद नंगे पांव पैदल यात्रा करते हुए हाथों में परचम लेकर अजमेर शरीफ की ओर रवाना होंगे. यह ऐतिहासिक यात्रा सूफी परंपरा, भाईचारे और अमन का संदेश देती है.
उर्स की तैयारियों को लेकर 8 दिसंबर की रात दरगाह परिसर में विशेष आयोजन किए जाएंगे.
रात 8:30 बजे दस्तारबंदी और रात 9:00 बजे से महफिल- ए- शमा का आयोजन होगा. इस कार्यक्रम में सूफी संतों के अनुयायी, उलेमा, खादिम, खानकाही सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे.
इस अवसर पर महरौली विधानसभा के विधायक गजेंद्र सिंह यादव और आरएसएस से जुड़े केंद्रीय अधिकारी डॉक्टर इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और परचम यात्रा को रवानगी करेंगे.
इसी परंपरा के तहत जमशेदपुर से भी एक जत्था दिल्ली महरौली पहुंच चुका है.
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित हज़रत बादशाह अब्दुल रहीम उर्फ चुना शाह बाबा मजार शरीफ से जुड़े यासीन मस्तान बच्चा कमेटी के सदस्य मोहम्मद अफरोज उर्फ मंगलू और छड़ी के सरदार जवान बाबा अपने साथियों के साथ इस पवित्र यात्रा में शामिल हुए हैं. जमशेदपुर से पहुंचे अकीदतमंद भी अन्य जायरीनों के साथ नंगे पांव परचम लेकर अजमेर शरीफ की ओर कूच करेंगे. आयोजकों के अनुसार यह छड़ी यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि एकता, सद्भाव और सूफी संस्कृति की जीवंत मिसाल है.
इस रवानगी के साथ अजमेर उर्स मुबारक की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है, जिसका इंतजार दुनिया भर के अनुयायी पूरे वर्ष करते हैं.

