सरायकेला: विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक को लंबी अवधि तक अन्यत्र प्रति नियोजन से मुक्त रखने की मांग को लेकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है.

संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक दत्ता ने ज्ञापन सौंपते हुए बताया है कि कोरोना महामारी के बाद लगभग 2 वर्षों की लंबी अवधि के पश्चात सभी कक्षाओं के लिए विद्यालय खुल चुका है, और विद्यार्थियों के पठन- पाठन को पटरी पर लाना एक कठिन चुनौती बना हुआ है. इस बीच 24 मार्च से लेकर 24 अप्रैल तक के लिए 50% शिक्षक- शिक्षिकाओं को मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा में वीक्षण कार्य के लिए लगाया गया है, जिसमें नई भुगतान प्रणाली पीएफएमएस के कारण मध्यान्ह भोजन योजना चरमरा चुकी है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापकों के द्वारा किसी तरह से जुगाड़ू व्यवस्था कर मध्यान भोजन योजना का संचालन किया जा रहा है. इसी दौरान सरकार के प्रधान सचिव के निर्देशानुसार विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12 तक के छात्र- छात्राओं का अभियान चलाकर जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाना है. शिक्षण कार्यों के इतर इस तरह के गंभीर प्रकृति के कार्यों में भी विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापकों को जोड़ा गया है. उन्होंने कहा है कि पूर्व में पंचायत, विधानसभा और लोक सभा निर्वाचन में लंबी अवधि तक के प्रकृति के कार्य जैसे नॉमिनेशन, मतपत्र का विखंडन तथा मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए मास्टर प्रशिक्षक के रूप में विद्यालय के प्रभारियों को भी लगाया जाता रहा है. जीत के फल स्वरुप विद्यालय की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है, और सरकार की सभी महत्वाकांक्षी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं. इसलिए व्यापक शिक्षा हित, विद्यालयों के सुगम संचालन तथा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के सुगम निष्पादन में विद्यालय प्रभारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापकों को लंबी अवधि के लिए प्रति नियोजन से मुक्त रखने की मांग उन्होंने उपायुक्त से की है.
