सरायकेला/ Pramod Singh सरायकेला में भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की द्वादश यात्राओं में से एक स्नान यात्रा 11 जून बुधवार को पूरे विधि- विधान के साथ सम्पन्न की जायेगी. जेष्ठ पूर्णिमा के दिन श्री विग्रहों की पवित्र स्नान यात्रा अनुष्ठित होती है. प्रात: काल में मंगलार्पण के उपरांत विग्रहों को डोर लगाने के बाद घण्टा, काहाल और छत्री सहित स्नान मण्डप के लिये यात्रा की शुरुआत होगी.

26 जून को नेत्र उत्सव मनाया जाएगा व 27 जून को भव्य रथ यात्रा निकलेगी. रथयात्रा के पूर्व इस महास्नान को एक धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है. 11 जून को देव स्नान पूर्णिमा पर चतुर्भुज मूर्ति प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन को मंदिर के रत्न सिंहासन से स्नान मंडप पर लाकर 108 कलश जल से स्नान कराया जायेगा. मान्यता है कि स्नान के बाद प्रभु बीमार हो जाते हैं और अगले 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं. इस दौरान मंदिर के अणसर गृह में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का जड़ी-बूटियों से इलाज किया जाता है.
15 दिनों के बाद प्रभु जगन्नाथ स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं. इसी दिन प्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन देवी सुभद्रा का नेत्रोत्सव किया जाता है. यह कार्यक्रम रथ यात्रा के एक दिन पूर्व होने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है. नेत्रोत्सव को “नव यौवन दर्शन” के रूप में भी जाना जाता है. यह अनासरा अवधि के अंत और देवताओं के स्वस्थ होने का प्रतीक माना जाता है.
“नेत्रोत्सव” शब्द का अर्थ है “आंखों का त्योहार”, जो देवताओं के एकांतवास की अवधि के बाद उनकी पहली झलक को दर्शाता है. के दौरान विग्रहों का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है. विग्रहों को नए कपड़े और आभूषण से सजाया जाता है, जो उनके नए यौवन और जोश का प्रतीक हैं.
इस वर्ष 26 जून को प्रभु जगन्नाथ बलभद्र देवी सुभद्रा के नव यौवन रूप का दर्शन होगा. इस दौरान चतुर्भुज मूर्ति का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है. 27 जून को प्रभु जगन्नाथ बलभद्र व देवी सुभद्रा की रथयात्रा निकलेगी. इसे गुंडिचा यात्रा भी कहा जाता है. प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व बड़े भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाएंगे. इसके बाद 5 जुलाई को प्रभु जगन्नाथ वापस रथ पर सवार होकर जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे. इसे घुरती या बाहुड़ा रथ यात्रा कहा जाता है.
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जहां प्रभु जगन्नाथ एक दिन में जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे, वहीं सरायकेला में यह यात्रा दो दिनों में पूरी होगी. रथ यात्रा को लेकर भगवान जगन्नाथ के रथ का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. इस वर्ष सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा नये रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी पहुंचेंग. ओड़िशा के कारिगारों द्वारा भव्य रथ का निर्माण किया जा रहा है.

*रथ यात्रा के प्रमुख कार्यक्रम*
11 जून: देव स्नान पूर्णिमा
26 जून: प्रभु जगन्नाथ का नेत्रोत्सव
27 जून: प्रभु जगन्नाथ का रथ यात्रा
01 जुलाई: हेरा पंचमी
04 जुलाई: नवमी संध्या दर्शन
5 जुलाई: बाहुडा यात्रा

Exploring world
