सरायकेला/ Pramod Singh ऐतिहासिक रथयात्रा के तहत आज महाप्रभु जगन्नाथ अपने अग्रज बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडीचा मंदिर मौसीबाड़ी पहुंचे. भगवान के मौसीबाड़ी पहुंचने के बाद रविवार से रथयात्रा मेला का शुभारंभ किया जाएगा.

मेला कमिटी के अध्यक्ष मनोज चौधरी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा के दौरान मौसीबाड़ी गुंडीचा मंदिर पहुंचने पर प्रत्येक वर्ष मेला का आयोजन किया जाता है. सरायकेला के मौसीबाड़ी में लगने वाला रथयात्रा मेला क्षेत्र में प्रसिद्ध है.
मेला में दिखेंगी दो युगों की झलकियां.
मनोज चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा के दौरान आयोजित होने वाले मेला में मूर्तिकारों द्वारा गरुड़ पुराण के साथ दो युगों की झलकियों को मूर्त रूप दिया गया है. जो विशेष आकर्षण का केंद्र होगा. मूर्तिकारों ने द्वापर युग के अंतिम चरण महाभारत काल और कलयुग के प्रथम चरण के भक्तों को मूर्त रूप दिया है. मूर्तिकारों ने द्वापर युग में महाभारत का द्यूत क्रीड़ा, जुआ खेल और द्रौपदी चीरहरण को दर्शाया है. जो महाभारत जैसे युद्ध का कारण बना था. वहीं मूर्तिकारों ने कलयुग के शुरुआत में जन्मे चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, संत श्री तुकाराम एवं श्री हरिदास जैसे भक्तों की मूरत को जीवंत रूप दिया है. श्री चौधरी ने बताया कि मूर्तिकारों ने अपनी कला से समाज को जुआ से होने वाली हानि के साथ ही समाज को भक्ति भाव से जीवन जीने का संदेश दिया है.

