सरायकेला Pramod Singh राज्य में बंद पढ़े क्रशर प्लांट को पुनः शुरू करने एवं दोहरी खनन नीति के कारण राज्य सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए पत्थर उद्योग सहयोग समिति मुखिया होटल चांडिल का प्रतिनिधिमंडल ईचागढ़ विधायक सविता महतो के नेतृत्व में शुक्रवार को उपायुक्त अरवा राजकमल से मुलाकात कर एक मांग पत्र सौंपा.

इस दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र के क्रशर उद्योग से जुड़े स्थानीय उद्यमी मौजूद रहे. बता दें कि राज्य में खनन बंद होने से सरकारी एवं गैर सरकारी निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़े हैं, जिससे खनन उद्योग से जुड़े कारोबारियों के साथ मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थित उतपन्न हो गई है.
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विधायक सविता महतो ने बताया कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के क्रशर मालिकों की समस्याओं से उपायुक्त को अवगत कराया गया है. मियमसम्मत जो भी समाधान होगा उसपर पहल करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही क्रशर मालिकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी उपायुक्त के माध्यम से सौंपा गया है. उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री इनकी मांगों पर अवश्य पहल करेंगे.
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सविता महतो (विधायक- ईचागढ़)
वहीं मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए मांग पत्र के माध्यम से चांडिल पत्थर उद्योग सहयोग समिति के अध्यक्ष सुधीर किस्कू ने बताया कि अविभाजित बिहार सरकार के समय से ही पूरे झारखंड में छोटे- छोटे पत्थर खनन पट्टा, पत्थर क्रशर ईकाई, बालू घाट एवं बंगला ईट भट्ठा यहां के स्थानीय लोगों के लिए रोजी रोटी का एक मात्र साधन है. झारखंड राज्य अलग होने के बाद यहां के शिक्षित बेरोजगार युवक कम पूंजी लगाकर इस व्यवसाय से रोजगार प्राप्त करते थे, साथ ही यहां के मजदूरों को भी आसानी से रोजगार प्राप्त होता था, लेकिन दुर्भाग्यवश पूर्ववर्ती सरकार की दोहरी खनन नीति के कारण विगत 35 वर्षों से स्वीकृत अनुज्ञाधारी छोटे- छोटे खनन पट्टा, पत्थर क्रशर इकाई, बालू घाट इत्यादि बंद पड़े हैं, जिसके कारण झारखंड राज्य के लोग लोगों के समक्ष बेरोजगारी एवं मजदूरों को दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है, एवं राज्य सरकार को राजस्व का हानि हो रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराया. इनमें मुख्य रूप से पूर्व से स्वीकृत सरकारी क्षेत्र में साधारण पत्थर खनन पट्टा जिसका क्षेत्र 5 हेक्टेयर से कम हो वैसे खनन पट्टा का नवीनीकरण करने झारखंड राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पूर्व की तरह सरकारी क्षेत्र एवं रैयती क्षेत्र के 5 हेक्टेयर से कम क्षेत्र पर साधारण पत्थर खनन पट्टा एवं पत्थर क्रशर इकाई से निर्धारित वन भूमि से 250 मीटर दूरी को 50 मीटर करने, वर्तमान राज्य सरकार की साधारण पत्थर का राजस्व दर प्रति घन मीटर 132 रुपए एवं 250 रुपए है, एक ही पत्थर का दो तरह के राजस्व को हटाकर प्रति घन मीटर 132 रुपए करने, कोल्हान प्रमंडल के अंतर्गत सरायकेला- खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल में पत्थर खनन पट्टा, ईट भट्ठा एवं लघु घाट आय का मुख्य स्रोत है. इस क्षेत्र के रैयती बंजर जमीन पर बृहद पैमाने पर पत्थर मौजूद है, इसलिए छोटे-छोटे क्रेशर मालिकों को बंजर जमीन पर एक समय सीमा के लिए पूर्व की भांति टीपी परमिट बिना पर्यावरणीय स्वीकृति एवं सहमति से जिला खनन पदाधिकारी को निर्गत करने का अधिकार देने की मांग की, ताकि रैयत बंजर जमीन से राज्य सरकार को राजस्व के साथ शिक्षित बेरोजगार युवकों एवं मजदूरों को आसानी से रोजगार उपलब्ध हो सके. उन्होंने बताया, कि छोटे-छोटे क्षेत्र जिसकी लागत दस लाख तक है को आसानी से संचालन के लिए कच्चे माल के रूप में उपलब्ध कराने एवं प्रदूषण नियंत्रण द्वारा स्वीकृत किए गए इकाई के मानकों का पालन करने हेतु सुचारू रूप से उपलब्ध हो सके.
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सुधीर किस्कू (अध्यक्ष)
