सरायकेला/ Pramod Singh जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है. जिले के यात्री वाहन खुलेआम प्रशासन के इस अभियान को अंगूठा दिखाते नजर आ रहे हैं.

प्रतिदिन जिले की सड़कों पर ओवरलोडिंग यात्री वाहनों का आवागमन धड़ल्ले से हो रहा है. वाहन चालक केवल अपनी कमाई बढ़ाने के चक्कर में यात्रियों की जान को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं. खासकर छोटे यात्री वाहनों में ओवरलोडिंग की घटनाएं आम हो गई हैं.
हालत यह है कि वाहन के अंदर सीटों पर यात्रियों को बैठाने के साथ- साथ वाहन की छत और पिछले दरवाजे की सीढ़ी पर भी यात्रियों को लटका कर सफर कराया जा रहा है. ऐसे दृश्य देखकर आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा मुख्य मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाया जाता है, जहां दोपहिया वाहन चालकों के हेलमेट और चौपहिया वाहनों के सीट बेल्ट की जांच तो होती है, लेकिन ओवरलोडिंग यात्री वाहनों के खिलाफ कभी सख्ती नजर नहीं आती. इसी वजह से ऐसे वाहन चालकों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है.
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब इन वाहन चालकों को समझ आएगी और कब प्रशासन ओवरलोडिंग के खिलाफ ठोस और सख्त कार्रवाई करेगा, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाया जा सके.

