सरायकेला: नगर पंचायत चुनाव में सरायकेला की सियासत अचानक गर्म हो गई है. झामुमो ने अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए मनोज कुमार चौधरी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही पार्टी द्वारा पूर्व में घोषित प्रत्याशी हरिहर लोहार की उम्मीदों पर विराम लग गया है.

सूत्रों के अनुसार पार्टी के अंदर तकनीकी कारणों और नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ी को लेकर यह निर्णय लिया गया है. हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. मनोज कुमार चौधरी निवर्तमान उपाध्यक्ष हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. झामुमो के समर्थन से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.
इधर आदित्यपुर नगर निगम में भी झामुमो के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. शनिवार को झामुमो नेता गणेश महाली की पत्नी शकुंतला महाली ने मेयर पद के लिए नामांकन प्रपत्र खरीदकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. यह कदम इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि पार्टी पहले ही भुगलू सोरेन उर्फ डब्बा सोरेन को मेयर पद का अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी और डब्बा सोरेन चुनावी तैयारी में जुटे हुए थे.
शकुंतला महाली के मैदान में उतरने से आदित्यपुर की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं. इसे पार्टी के अंदरूनी शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक दबाव की राजनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी आधिकारिक रूप से किसे समर्थन देती है या फिर समीकरणों में और बदलाव होते हैं.
सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अब तक जिन प्रमुख नामों ने नामांकन प्रपत्र खरीदा है उनमें विधायक चंपई सोरेन के प्रतिनिधि सनद कुमार आचार्य, निवर्तमान उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी, राजा आदित्य प्रताप सिंह देव, भाजपा नेता सुमित चौधरी और जलेश कवि शामिल हैं. इससे मुकाबला बहुकोणीय होता दिख रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो के इस फैसले से चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है. संगठनात्मक एकजुटता, स्थानीय समीकरण और व्यक्तिगत प्रभाव इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. फिलहाल सरायकेला नगर पंचायत और आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में सियासी घमासान के संकेत साफ नजर आने लगे हैं.

