सरायकेला: ईचागढ़ में बालू गाड़ियों से अवैध वसूली और पुलिस के साथ हुई मारपीट मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए JLKM नेता तरुण महतो को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर विवाद में तरुण महतो ही केंद्र में क्यों रहते हैं. पिछले कुछ महीनों में JLKM नेताओं की आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया से लेकर ग्रामीण इलाकों तक की दहशत ने उद्यमियों को असुरक्षित और पुलिस प्रशासन को नाराज कर दिया है.

स्थानीय लोग कहते सुने जा रहे हैं कि JLKM नेताओं का रवैया ऐसा हो गया है मानो कानून उनकी मुट्ठी में हो. इससे पार्टी की विचारधारा और विश्वसनीयता दोनों पर असर पड़ रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी सुप्रीमो जयराम महतो को आने वाले दिनों में अपने उन्मादी कार्यकर्ताओं की वजह से राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. झारखंड की बड़ी आबादी उद्यमियों, कारोबारियों और प्रवासी श्रमिकों पर आधारित है, जिससे टकराकर कोई भी दल अपनी जमीन खो सकता है. JLKM शीर्ष नेतृत्व को AJSU के अतीत और वर्तमान से सबक लेकर भविष्य तय करना चाहिए.
सरायकेला- खरसावां जिले में इससे पहले भी तरुण महतो कई विवादों में घिर चुके हैं. आदित्यपुर स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मजदूरों से मारपीट के मामले में उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगे थे. प्रेम मार्डी को जेल भेजा गया, जबकि तरुण महतो भूमिगत रहकर जमानत लेने में सफल रहे. बाद में उन्होंने JLKM के सिंबल पर ईचागढ़ से चुनाव लड़ा, जिसे वे हार गए, लेकिन क्षेत्र में दहशत फैलाने का सिलसिला जारी रहा. हाल ही में नीमडीह में एसएम स्टील प्लांट को लेकर जनसुनवाई के दौरान भी ग्रामीणों को भड़काने के आरोप उन पर लगे. विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योग- व्यापार के खिलाफ इस तरह का उन्माद झारखंडी युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है.
ईचागढ़ की ताजा घटना पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. यदि पुलिस अवैध वसूली में शामिल थी, तो तरुण महतो रात के अंधेरे में अपने समर्थकों के साथ वहां क्या कर रहे थे. उन्होंने कानून हाथ में क्यों लिया और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी. सोशल मीडिया पर सक्रिय JLKM कार्यकर्ताओं ने कथित वसूली का वीडियो तुरंत जारी क्यों नहीं किया. घटना के बाद भ्रम फैलाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिशों पर भी सवाल उठ रहे हैं.
पुलिस का दावा है कि तरुण महतो के गाड़ियों से शराब की बोतलें और लाठी-डंडे बरामद हुए. ऐसे में यह सवाल उठता है कि एक लोकप्रिय नेता के काफिले में ये सामान क्या कर रहे थे. दूसरी ओर, तरुण महतो की पत्नी ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया है, लेकिन यह भी देखने की जरूरत है कि क्या उनके समर्थकों ने पुलिस पर हमला किया था.
पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के लिए यह आत्ममंथन का समय है कि आखिर स्थानिय स्तर पर उनके समर्थक किस दिशा में जा रहे हैं. हमारी यह रिपोर्ट किसी पार्टी विशेष को आहत करने के लिए नहीं, बल्कि यह संदेश देने के लिए है कि क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव, कानून का राज और लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रहना अत्यंत आवश्यक है.

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