सरायकेला: सरायकेला नगर पंचायत की अध्यक्षा मीनाक्षी पटनायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरायकेला- खरसावां जिले के प्रत्येक विद्यालय में उड़िया भाषा के शिक्षको की नियुक्ति एवं पदस्थापन तथा उड़िया पुस्तक की आपूर्ति की मांग की है. नपं अध्यक्षा मीनाक्षी पटनायक ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, कि झारखंड गठन के बाद उड़िया भाषा को उपेक्षा की नजर से देखा जा रहा है. हमारे बच्चे को उड़िया भाषा में पढ़ने से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने कहा विद्यालय में उड़िया शिक्षक की ना ही नियुक्ति की जा रही है, और ना ही उड़िया पुस्तक सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही है, बल्कि उड़िया शिक्षकों को अन्यत्र हिंदी विद्यालय में स्थानांतरित किया जा रहा है. मीनाक्षी पटनायक ने कहा सरायकेला नगर क्षेत्र के 10 नंबर वार्ड में सरकारी विद्यालय था, जहां पर केवल उड़िया छात्र- छात्राएं पढ़ते थे, परंतु इन सारे विद्यालयों को एक साजिश के तहत बंद कर दिया गया तथा उड़िया शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उड़िया भाषा को एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हुई और बच्चे शिक्षकों के अभाव में बाध्य होकर हिंदी पढ़ने को मजबूर हो गए जो सरासर गलत है. उन्होंने कहा यह समस्या केवल हमारे जिले में ही नहीं पूरे झारखंड के उड़िया बहुल जिले में है. मीनाक्षी पटनायक ने कहा 50 वर्षों तक भाषा के लिए बिहार सरकार के साथ उड़िया भाषियों ने संघर्ष किया, परंतु उस समय अपनी अपनी भाषा में पढ़ने के लिए स्वाधीनता थीप्राथमिक से लेकर उच्च विद्यालय एवं कॉलेज तक में उड़िया शिक्षक उपलब्ध रहते थे और नीति भी होती थी. उड़िया भाषा झारखंड के सभी भाषा- भाषी को सम्मान करते रहे हैं, और इसलिए हमारे भाषा को उचित सम्मान एवं उचित स्थान मिलना चाहिए जो अब तक प्राप्त है. नगर पंचायत अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से निवेदन करते हुए कहा कि इन सारे तथ्यों को देखते हुए उड़िया भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उचित एवं न्याय संगत विचार कर सभी विद्यालयों में उड़िया शिक्षक की नियुक्ति एवं उड़िया पुस्तक की आपूर्ति की दिशा में संबंधित विभागों को निर्देश देने की कृपा करे.


