संपादक की कलम से: सरायकेला- खरसावां जिले में निकाय चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है. नामांकन प्रक्रिया अंतिम दौर में है, लेकिन गैर दलीय चुनाव के बावजूद राजनीतिक दलों के भीतर जबरदस्त खींचतान साफ दिख रही है.

सरायकेला नगर पंचायत में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पहले हरिहर लोहार को मैदान में उतारा था, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी उम्मीदवारी अमान्य होने के बाद पार्टी ने पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी को समर्थन दे दिया है. मनोज चौधरी मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे.
भाजपा की ओर से अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होने से अटकलों का बाजार गर्म है. सनंद कुमार आचार्य और सुमित चौधरी ने पर्चा खरीदा है, लेकिन पार्टी ने किसी के नाम पर मुहर नहीं लगाई है. आदित्यपुर नगर निगम में पहले से घोषित प्रत्याशी डब्बा सोरेन की राह उस समय मुश्किल होती दिखी जब गणेश महाली की पत्नी और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शकुंतला महाली ने मेयर पद के लिए टिकट खरीद लिया. इसे संभावित बगावत और स्टैंडबाई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
महापौर पद की दौड़ में बाहुबली बास्को बेसरा भी कूद पड़े हैं. वहीं भाजपा खेमे से बोरजो राम हांसदा, विनोती हांसदा, प्रभासिनी कालुंडिया और संजय सरदार ने भी पर्चा खरीदा है. प्रभासिनी कालुंडिया और बास्को बेसरा निवर्तमान मेयर गुट के करीबी माने जाते हैं. बोरजो और विनोती हांसदा निवर्तमान डिप्टी मेयर बॉबी सिंह के समर्थक बताए जाते हैं, जबकि संजय सरदार पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के करीबी माने जाते हैं.
कांग्रेस ने सरायकेला नगर पंचायत से राजा प्रताप आदित्य सिंह देव, आदित्यपुर नगर निगम से विक्रम किस्कू और कपाली नगर परिषद से तस्लीमा खातून को समर्थन देने की घोषणा की है. हालांकि आदित्यपुर जैसे अहम सीट पर कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पार्टी के पास कालीपद सोरेन जैसे मजबूत चेहरे की चर्चा थी.
दूसरी ओर सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बबलू सोरेन भी टिकट की रेस में हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा एन वक्त पर उन्हें समर्थन दे सकती है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
कुल मिलाकर सरायकेला के तीनों निकायों- आदित्यपुर नगर निगम, कपाली नगर परिषद और सरायकेला नगर पंचायत में दिग्गजों की भीड़, गुटबाजी और अंदरखाने की रणनीति ने चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है. अब सभी की नजरें पार्टी स्तर पर होने वाली अंतिम घोषणा पर टिकी हैं.

