सरायकेला/ Pramod Singh खरकई नदी के तट पर अवस्थित मां झुमकेश्वरी पूजा स्थल पर आखान के दिन गुरुवार को कोल्हान प्रमंडल के मुखी समाज द्वारा झुमकेश्वरी पूजा सह मिलन समारोह एवं वनभोज का आयोजन किया गया. इस अवसर पर समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति- रिवाज के अनुसार मां झुमकेश्वरी की पूजा- अर्चना की और सपरिवार वनभोज में शामिल हुए.

बताया गया कि खरकई नदी के तट पर स्थित मां झुमकेश्वरी पूजा स्थल पर लोगों की गहरी आस्था और विश्वास है. सुख, शांति और समृद्धि की कामना को लेकर दूर- दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि किसी भी शुभ कार्य के आयोजन या शुभारंभ से पूर्व झुमकेश्वरी माता की पूजा- अर्चना की जाती है.
मुखी समाज के लोग मकर संक्रांति के बाद पहले माघ माह में यहां आकर मां झुमकेश्वरी की पूजा करते हैं और मिलन समारोह सह पिकनिक का आयोजन करते हैं. प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पहले गुरुवार को बिहार, ओड़िशा के राउरकेला समेत कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला- खरसावां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में मुखी समाज के लोग यहां पहुंचे.
पूजा के दौरान पारंपरिक रूप से मुर्गे की पूजा की गई. इसके बाद समाज के लोगों ने खरकई नदी के तट पर पिकनिक मनाया और एक- दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सुख- शांति और खुशहाली की कामना की.
झुमकेश्वरी पूजा स्थल और खरकई नदी के चटानों पर समाज के लोगों की भारी भीड़ देखी गई. इस दौरान भैरव बाबा से भी सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की गई. करुवां समाज के जिला अध्यक्ष रंजन करुवां ने बताया कि मुखी समाज की यह पूजा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल और ओड़िशा से भी श्रद्धालु मां झुमकेश्वरी की पूजा करने यहां आते हैं और मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने भी मां झुमकेश्वरी की पूजा- अर्चना कर क्षेत्र की सुख- समृद्धि और शांति की कामना की.

