सरायकेला/ Pramod Singh जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है. इमरजेंसी सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस व्यवस्था की बदहाली ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिला मुख्यालय प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहां एक 108 एंबुलेंस खराब हो जाने के बाद दूसरी 108 एंबुलेंस को उसे खींचकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह एक 108 एंबुलेंस मरीज लाने के लिए कालाडूंगरी की ओर गई थी. मरीज को एंबुलेंस में बैठाने के बाद वाहन स्टार्ट नहीं हो सका. इमरजेंसी स्थिति में मरीज को लेकर अफरा- तफरी मच गई. इसके बाद तत्काल दूसरे 108 एंबुलेंस को बुलाया गया. दूसरा एंबुलेंस मौके पर पहुंचा और मरीज के साथ- साथ खराब पड़ी एंबुलेंस को खींचते हुए अस्पताल पहुंचाया गया.
इस घटना ने जिले की एंबुलेंस सेवा की जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है. इमरजेंसी में मरीज की जान बचाने के लिए जिस सेवा पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है, वही सेवा खुद बीमार नजर आई. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एंबुलेंस समय पर और सही हालत में न पहुंचे तो गंभीर मरीज की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है.
लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है.
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा मंचों से झारखंड में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की बात कही जाती है, लेकिन जब एंबुलेंस जैसी बुनियादी इमरजेंसी सेवा ही जवाब दे जाए, तो मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है. यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति पर भी सोचने को मजबूर करती है.

