सरायकेला/ Pramod Singh झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष भोला महंती ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से निकलकर जो व्यक्ति झारखंड की राजनीति के ध्रुव तारा बने, सत्ता के शिखर तक पहुंचे, वह अब हमारे बीच नहीं रहे.

भोला महंती ने कहा कि गुरुजी केवल एक राजनेता नहीं थे बल्कि झारखंड के गरीबों, शोषितों, किसानों और मजदूरों की आवाज़ थे. उनके संघर्ष ने ही उन्हें दिशोम गुरु की पहचान दी.
झामुमो की पहचान तीर- धनुष से थी और इस तीर- धनुष के पीछे गुरुजी का मार्गदर्शन था. उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद बिनोद बिहारी महतो और एके राय के बाद अब गुरुजी के जाने से झारखंड आंदोलन के एक युग का अंत हो गया है. गुरुजी हर वर्ष खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने खरसावां आते थे. हर विधानसभा चुनाव में प्रचार हेतु सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में आते थे. भोला महंती ने बताया कि वर्ष 2004 में गुरुजी सरायकेला के बिरसा मुंडा स्टेडियम, 2009 और 2014 में राजनगर हाई स्कूल मैदान, तथा 2019 में सिदाडीह मैदान में आखिरी बार सभा को संबोधित करने आए थे. उनका जाना केवल एक व्यक्ति के जीवन का अंत नहीं, बल्कि झारखंडियों की आवाज, आंदोलन, सोच और विचारधारा के प्रतीक का विराम है. उन्होंने श्रद्धांजलि स्वरूप कहा- अंतिम जोहार गुरुजी को.
आपका संघर्ष हमेशा प्रेरणा देता रहेगा.

