सरायकेला/ Pramod Singh वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. लेकिन हाथी भगाने के लिए विभाग के पास जरूरी संसाधन तक नहीं हैं. हाथी भगाने में जरूरी टॉर्च, पटाखा, टाट बोरा और जला हुआ मोबिल तक विभाग के पास उपलब्ध नहीं है. इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है.

सूत्रों के अनुसार विभाग में कार्यरत वनरक्षी अपनी जेब से खर्च कर पटाखा और मशाल खरीदते हैं और हाथी को भगाने की कोशिश करते हैं. मंगलवार की रात भी वनरक्षियों ने अपने खर्चे से ही हाथी भगाया.
इस पूरी लापरवाही के पीछे रेंज ऑफिसर की अनदेखी सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक रेंज ऑफिसर दिग्विजय सिंह रिटायर हो चुके हैं, लेकिन अपनी ऊंची पहुंच के दम पर सेवा विस्तार करा लिया है. वे एक या दो नहीं, बल्कि आठ स्थानों के प्रभार में हैं. बताया गया कि वे महीने में एक या दो बार ही सरायकेला आते हैं. बाकी समय कर्मचारी उनके घर जाकर दस्तखत कराते हैं. रेंज अंतर्गत आवश्यक सामग्री की व्यवस्था रेंज ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है. लेकिन सामग्री उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीणों की सुरक्षा भगवान भरोसे है. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है, जिससे उनके भीतर आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.

