सरायकेला/ Bipin Varshney पिछले वर्ष गम्हरिया स्थित जेसफसीआई गोदाम अग्निकांड में झुलसकर सहायक गोदाम प्रबंधक (एजीएम) अभिषेक हाजरा और उनके साथी राजू सेनापति की मौत के बाद भी जिले में सरकारी खाद्यान्न व्यवस्था पर सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ढुलाई से लेकर पीडीएस डीलरों को अनाज आपूर्ति तक बड़े पैमाने पर धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं.

आरटीआई कार्यकर्ता हरिदत्त तिवारी द्वारा जिला आपूर्ति पदाधिकारी को लिखे गए पत्र से यह खुलासा हुआ है कि गम्हरिया प्रखंड में न सिर्फ नियमों की अनदेखी कर खाद्यान्न का वितरण किया गया, बल्कि ऐसे डीलरों को भी अनाज उपलब्ध कराया गया जिनकी दुकानें विभागीय आदेश से निलंबित थीं या जिनका निबंधन रद्द किया जा चुका था. इस पत्र के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मचना तय माना जा रहा है.
गौरतलब है कि दिवंगत एजीएम अभिषेक हाजरा को लेकर मीडिया ट्रायल के जरिए विभाग ने लंबे समय तक खुद को पाक- साफ साबित करने की कोशिश की. इलाज से लेकर मौत के बाद तक उन्हें कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर पेश किया गया, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस और विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि अभिषेक हाजरा और राजू सेनापति की मौत कैसे हुई और खाद्यान्न घोटाले की वास्तविक राशि कितनी थी.
इसी बीच जिन डीएसडी अभिकर्ता, सहायक गोदाम प्रबंधक और प्रभारी बीसीओ को गम्हरिया के पीडीएस डीलरों को खाद्यान्न आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई, उन पर ही अब गंभीर आरोप लगने लगे हैं. हरिदत्त तिवारी ने अपने पत्र में चांडिल के डीएसडी अभिकर्ता नवीन कुमार शर्मा, सहायक गोदाम प्रबंधक भुवन महतो और गम्हरिया के प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार चौधरी पर सरकारी अनाज में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है.
उन्होंने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक माह नवंबर 2025 और दिसंबर 2025 का विपत्र जारी न किया जाए.
पत्र में बिंदुवार आरोप लगाते हुए कहा गया है कि नवंबर और दिसंबर 2025 में गम्हरिया प्रखंड के पीडीएस दुकानदारों को खाद्यान्न आपूर्ति के दौरान बोरे का वजन नहीं दिया गया. यह कार्य चांडिल के सहायक गोदाम प्रबंधक और डीएसडी अभिकर्ता की आपसी मिलीभगत से किया गया. इसके अलावा आरोप है कि चांडिल डीएसडी द्वारा राशन डीलरों से अवैध रूप से रोड टोल टैक्स की वसूली की गई, जबकि इसके लिए कोई वैध विभागीय आदेश मौजूद नहीं था. खाद्यान्न वितरण के समय डीएसडी अभिकर्ता अपने वाहनों पर भार मापक यंत्र भी नहीं रखते और दुकानों पर वजन किए बिना बड़े कांटे पर वजन कर अनाज पहुंचाया जाता रहा. हरिदत्त तिवारी ने यह भी आरोप लगाया है कि निलंबित और अनुज्ञप्ति रद्द पीडीएस दुकानदारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया, जबकि उनके ई-पॉश मशीन में डिस्पैच दर्ज किया गया है. वहीं, इन दुकानों से खाद्यान्न का उठाव भी आज तक नहीं किया गया है. पत्र में यह भी उल्लेख है कि नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान एसआइओ के तहत फर्जी दुकानदारों से हस्ताक्षर कराए गए. बिना जिला आपूर्ति कार्यालय से ढुलाई आदेश प्राप्त किए वाहनों से खाद्यान्न परिवहन किया गया और वाहनों के बीमा, फिटनेस, रोड टैक्स व अन्य अनिवार्य कागजातों की जांच तक नहीं की गई. आरटीआई अभिकर्ता का कहना है कि क्षमता से अधिक भार लादकर खाद्यान्न ढुलाई की गई, जिससे झारखंड सरकार के राजस्व को प्रतिमाह नुकसान पहुंचाया गया. इसके साथ ही नवंबर 2025 के खाद्यान्न का डिस्पैच निर्धारित तिथि बीतने के बाद किए जाने का भी आरोप लगाया गया है. हरिदत्त तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि खाद्यान्न ढुलाई से लेकर वितरण तक की सभी अनियमितताएं चांडिल डीएसडी अभिकर्ता, सहायक गोदाम प्रबंधक और गम्हरिया बीसीओ की आपसी मिलीभगत से की गई हैं. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

