सरायकेला/ Pramod Singh रंग, गुलाल और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बनने जा रहा है सरायकेला. ब्रज की तर्ज पर यहां की ऐतिहासिक दोल यात्रा 2 मार्च की शाम पूरे नगर में आध्यात्मिक उल्लास बिखेरेगी. आध्यात्मिक उत्थान श्री जगन्नाथ मंडली के तत्वावधान में निकलने वाली इस परंपरागत यात्रा में राधा- कृष्ण नगर भ्रमण कर श्रद्धालुओं के साथ गुलाल की होली खेलेंगे.

दोल यात्रा की शुरुआत कंसारी टोला स्थित प्राचीन मृत्युंजय खास श्री राधा- कृष्ण मंदिर से शाम चार बजे होगी. राधा- कृष्ण की कांस्य प्रतिमाओं का भव्य श्रृंगार कर उन्हें पालकी यानी दोल पर विराजमान कराया जाएगा. इसके बाद नगर भ्रमण के दौरान कान्हा हर घर में दस्तक देंगे और श्रद्धालु शंखध्वनि, उलुध्वनि और आरती के साथ उनका स्वागत करेंगे.
सरायकेला स्टेट के महाराजा उदित नारायण सिंहदेव के समय वर्ष 1818 से दोल यात्रा की परंपरा चली आ रही है. वर्ष 1990 से इस आयोजन का निर्वहन आध्यात्मिक उत्थान श्री जगन्नाथ मंडली द्वारा किया जा रहा है. इस वर्ष दोल यात्रा के 36 वर्ष पूरे होने पर विशेष झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी.
दोल यात्रा के दौरान कृष्ण- हनुमान मिलन और हरिहर मिलन की झांकी प्रस्तुत की जाएगी. पारंपरिक वाद्ययंत्र मृदंग, झांझ और गिनी की धुन पर भक्त झूमते हुए यात्रा में शामिल होंगे. कलाकारों द्वारा घोड़ा नाच और काठी नाच की प्रस्तुति उत्कल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेगी.
आयोजक प्रमुख ज्योति लाल साहू ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपने- अपने घरों के द्वार को गोबर से लीपकर अल्पना और रंगोली से सजाएं तथा दीप यज्ञ के साथ भगवान राधा- कृष्ण का स्वागत करें. मान्यता है कि दोल यात्रा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के रथ पर दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसे में 2 मार्च की शाम सरायकेला भक्ति, रंग और उल्लास के महासंगम में डूबने को तैयार है.

