सरायकेला: जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त अरवा राजकमल की अध्यक्षता में ‘चैत्रपर्व 2022’ के आयोजन को लेकर समिति सदस्यों की बैठक आयोजित की गई. पर्व के आयोजन को लेकर बिंदुवार चर्चा करते हुए कोविड मानकों को ध्यान में रखते हुए लोक आस्था के पर्व पर स्थानीय कलाकारों के साथ स्थानीय रीति रिवाज एवं पारंपरिक विधि विधान से पूजा संपन्न करने तथा स्थानीय कलाकारों के साथ इंडोर कार्यक्रम कराने पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया.

उपायुक्त ने कहा कि सांकेतिक कार्यक्रम कराने का मुख्य उदेश्य स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शन का अवसर प्रदान करना है. बैठक मे उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए पूजा स्थल पर भी पूजा में सम्मिलित सदस्यगण फेस मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगे. साथ ही कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कलाकार कोविड टीकाकरण से आच्छादित होंगे. उपायुक्त ने कहा कि इस बार भी पूर्व की भांति कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए भीड़ इकट्ठा होने वाले बड़े आयोजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे. उपायुक्त ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से सम्मानित जिले के दो गणमान्यों को सम्मानित किया जायेगा. उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी एवं स्थानीय पुलिस पदाधिकारी को कहा कि स्थानीय रीति रिवाज के साथ पूजा संपन्न कराने को ध्यान में रखते हुए सभी नदी घाटों का ससमय साफ- सफाई कराएं साथ ही नियमित रूप से नदी घाटों पर पुलिस पदाधिकारी एवं विभागीय पदाधिकारी निरीक्षण करें.
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि चैत्र पर्व- 2022 का फेसबुक लाइव से प्रसारण किया जायेगा, ताकि कोविड मानकों का अनुपालन करते हुए अधिक से अधिक लोगो को कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया जा सकें. उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य कला संस्कृति को अगली पीढ़ी तक संरक्षित रखने हेतु आवासीय विद्यालय में बच्चों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाए. साथ ही इच्छुक कलकारों को जोड़ा जाए. बैठक में उप विकास आयुक्त प्रवीण कुमार गागराई, आईटीडीए निदेशक संदीप कुमार दोराईबुरु, अपर उपायुक्त सुबोध कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला राम कृष्ण कुमार, डीएसपी हेड क्वार्टर चंदन कुमार वत्स, प्रखंड विकास पदाधिकारी सरायकेला, जिला योजना पदाधिकारी, कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत सरायकेला एवं अन्य समिति सदस्यगण उपस्थित रहे.

1 Comment
सभी पर्व-त्योहार मनाने में प्रशासन छूट देती है,जबकि झारखंड के पारम्परिक पर्व-त्योहार पर ही कोरोना का कहर ढाया जाता है।इधर मार्च,३१ से सभी तरह की कोविड प्रोटोकॉल समाप्त करने की बात चली थी।