आदित्यपुर/ Parmeshwar Gorai निश्चित तौर पर गुरुवार का दिन भाजपा नेत्री रही दुर्गा दास के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया. सात वर्षो के लंबे संघर्ष के बाद ज़ब सरायकेला कोर्ट के एडीजे- 1 चौधरी एहसास मोइज की अदालत ने सजा के बिंदु पर अपना फैसला सुनाया उससे दुर्गा दास की आंखो में आंसू छलक पड़े.

अपने मरहूम भाई कृष्णा दास को याद करते हुए दुर्गा दास ने बताया कि न्यायपालिका पर आस्था थी. उम्मीद की डोर नहीं टूटने दिया. कई बार हिम्मत टूटा कई यातनायें झेला मगर आज न्यायलय ने जो फैसला सुनाया है उससे मेरे भाई की आत्मा और मेरे संघर्ष की जीत हुई है.

आरोपियों की तस्वीर
बतौर दुर्गा दास मेरे निर्दोष भाई का अपहरण कर हत्यारों ने उसकी जलाकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. साक्ष्य छिपाने की नियत से उड़ीसा के रायरंगपुर में शव फेंक दिया था. ज़ब आरोपी मनोज मंडल (बोस्ता) और मनोज दास जमानत पर रिहा हुए थे उस वक्त मेरे घर के पास जश्न मनाया था. उस वक्त मेरे दिल पर क्या गुजरी थी इसका बयां नहीं कर सकती. इन सात वर्षो में न्यायपालिका के कई रूप देखे मगर अंततः न्याय की जीत हुई.
क्या था मामला
9 दिसंबर 2018 को कृष्णा दास का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. साक्ष्य छिपाने के लिए शव को उड़ीसा के रायरंगपुर ले जाकर जला दिया गया था. पुलिस ने अधजला शव बरामद किया और 11 दिसंबर 2018 को मृतक की बहन दुर्गा दास ने आदित्यपुर थाना में मामला दर्ज कराया था. करीब सात साल चली सुनवाई में वादी पक्ष ने 11 गवाह और बचाव पक्ष ने चार गवाह पेश किए. आखिरकार अदालत ने धारा 302, 364/34 और 201/34 आईपीसी के तहत दोनों आरोपियों को दोषी पाया और आजीवन कारावास के साथ 35 हजार जुर्माने की सजा सुनाई.
न्याय व्यवस्था पर सवाल और सबक
यह मामला एक बार फिर न्यायिक प्रणाली की धीमी गति पर सवाल खड़ा करता है. 2018 में दर्ज हुए इस मामले का फैसला 2025 में आ सका. इतने वर्षों में पीड़ित परिवार ने मानसिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर गहरी चोटें झेली. लेकिन यह भी साफ है कि देर से मिला न्याय भी समाज को यह संदेश देता है कि अपराध कितना भी संगीन क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना नामुमकिन है. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अपार लोक अभियोजक कपिल देव सामड ने बताया कि फैसले के तहत वादिनी को कंपनसेशन भी दिलाया जाएगा. इसके लिए माननीय अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को निर्देश दिए हैं.

