सरायकेला: झारखंड सरकार के श्रम विभाग के नए फरमान के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में दहशत फैल गई है. इसको लेकर खरसावां विधायक दशरथ गागराई भी चिंतित है. और उन्होंने सरायकेला- खरसावां एवं चाईबासा श्रम अधीक्षक को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि अभियोजन चलाने संबंधी करणपृक्षा नोटिस को रद्द करते हुए प्रखंड स्तर पर शिविर लगाकर इन अधिनियमों का व्यापक प्रचार- प्रसार करें एवं मकान बना रहे लोगों को लेबर सेस की राशि जमा करने संबंधी काउंसलिंग करें.

क्या है मामला जानें
दरअसल चाईबासा एवं सरायकेला- खरसावां के श्रम अधीक्षक द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में दस लाख से अधिक का निर्माण करा रहे भवन मालिकों को भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियम) अधिनियम 1996 तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 के विभिन्न नियमों का हवाला देकर अभियोजन चलाने की चेतावनी संबंधी नोटिस जारी की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में भय और संशय का माहौल है. बहुत ऐसे लोगों को भी नोटिस किया गया है जो वर्षों पूर्व अपना निर्माण कार्य पूर्ण कर चुके हैं. विधायक ने श्रम अधीक्षक को लिखा है कि अधिकांश लोगों को इन अधिनियमों की जानकारी नहीं है और विभागीय स्तर से भी इन नियमों के संबंध में पूर्व में किसी प्रकार का प्रचार- प्रसार नहीं किया गया है जिससे लोगों में भय और संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है. उन्होंने पत्र में कहा है कि आपके द्वारा कारणपृक्षा जारी करने की जो नीति अपनाई गई है उससे राज्य में स्थापित लोकप्रिय सरकार की छवि धूमिल होने की प्रबल संभावना है.
क्या कहा श्रम अधीक्षक ने
इस संबंध में सरायकेला- खरसावां एवं चाईबासा के संयुक्त श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर ने बताया कि विधायक द्वारा जो सुझाव दिए गए हैं वह स्वागत योग्य है. विभाग प्रखंड स्तर पर नियमों से संबंधित जानकारी को लेकर व्यापक प्रचार- प्रसार करने की रूपरेखा तैयार कर रही है. उन्होंने बताया कि शहरी एवं निकाय क्षेत्रों में लोग नक्शा पास करने के एवज में एक फ़ीसदी टैक्स देते हैं यह नियम ग्रामीण क्षेत्र के लिए भी लागू है मगर अज्ञानता के अभाव में लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं. विभाग द्वारा कुछ लोगों को नोटिस जारी की गई है जिसका रिव्यू किया जाएगा.
विपक्ष का आरोप
मामले को लेकर सरायकेला खरसावां जिला के भाजपा अध्यक्ष उदय सिंह देव ने इसे सरकारी मशीनरी का तुगलकी फरमान बताया. उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर सरकारी विभाग पुराने नियमों का हवाला देकर जनता को परेशान करने का हथकंडा अपना रहे हैं. ताकि मंइयां सम्मान योजना की राशि की उगाही हो सके. उन्होंने कहा कि राज्य में जब अर्जुन मुंडा की सरकार थी तब राज्य के लोगों को मुफ्त बालू दी जाती थी उसे वक्त भी कानून था मगर कुछ नियमों को जनता के हित में मौन रखना पड़ता है सरकार यदि लोगों की इतनी हितेषी है तो बालू घाटों की नीलामी कराये जिससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति हो. ऐसे नियमों को यदि सरकार और सरकारी मशीनरी जनता पर थोपेगी तो भारतीय जनता पार्टी पुरजोर विरोध करेगी.

