आदित्यपुर: नगर निगम वार्ड- 17 में निर्माणाधीन समय कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट सनराईज पॉइंट पर ग्रहण लग सकता है. जिससे उक्त प्रोजक्ट में फ्लैट और डुप्लेक्स बुक करानेवाले निवेशकों को मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है. वैसे भी उक्त प्रोजेक्ट तय समयसीमा से काफी पीछे चल रहा है और सरकारी और रैयती जमीन कब्जा करने, नक्शा विचलन कर निर्माण कार्य करने और रेरा के नियमों के विरुद्ध नगर निगम द्वारा विस्तार दिए जाने के मामले में डेवलपर्स के खिलाफ डीसी कोर्ट में मामला लंबित है.

इस बीच बीते शुक्रवार को समय कंस्ट्रक्शन के एक निदेशक राजेश कुमार सिंह ने अपने तीन अन्य निदेशकों अनूप रंजन, राम प्रकाश पांडे, राजीव कुमार एवं उनकी पत्नियों जो उक्त कंपनी में पांच- पांच फीसदी की शेयरहोल्डर हैं के खिलाफ 9 करोड़ से भी अधिक के फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए जमशेदपुर के साकची थाने में मामला दर्ज कराया है. पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. ऐसे में जांच की जद में पूरी कंपनी आएगी और इसका असर कंपनी द्वारा चल रहे सभी प्रोजेक्ट पर पड़ना तय है.
विदित हो कि कंपनी के निदेशक राजेश कुमार सिंह ने पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कंपनी के तीनों निदेशकों पर गलत तरीके से उन्हें और उनकी पत्नी भारती सिंह को निदेशक मंडल से बाहर करने का आरोप लगाया था. उन्होंने बताया था कि उक्त निर्णय को उन्होंने NCLT कोलकाता में चुनौती दी है. इसी बीच तीनों नेदशकों ने मिलकर साकची स्थित कंपनी के प्राधन कार्यालय से उनके चेम्बर से टेबल, कुर्सी सहित अन्य दस्तवेज़ों को गायब कर दिया. बीते शुक्रवार को जब राजेश सिंह अपने कार्यालय पहुंचे और अपने पार्टनर्स से बातचीत कर अपना- हिसाब किताब लेना चाहा तो मदद के बजाए उन्होंने पुलिस बुला ली. पुलिस की मौजूदगी में राजेश सिंह ने जब अपने चेम्बर में रखे लॉकर को खोलना चाहा तो वह नहीं खुला. उनका दावा है कि लॉकर के ताले को बदल दिया गया है और उसमें रखे दो लाख नगद और जरूरी दस्तावेज गायब हैं. उधर निदेशक अनूप रंजन ने भी साकची थाने में कांउटर केस किया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. जानकार मानते हैं कि अब जब कंपनी का मामला कोर्ट और पुलिस तक पहुंच गया है तो निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है. खासकर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में पैसे लगाने से पहले स्टेट्स की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. बता दें कि उक्त कंपनी ने शहर में कई बड़ी रिहायशी सोसाइटियां डेवलप की है जो आज शहर में अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं. निदेशक मंडली के बीच उपजे विवाद ने एक उभरते फर्म को गर्त में पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि इसके पीछे सफेदपोश, नौकरशाह और निदेशकों के बीच संवादहीनता मुख्य कारण है. बहरहाल उक्त फर्म में निवेश करना आज की तारीख में किसी खतरे से कम नहीं है.

