साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. दो साल पहले डीएमएफटी फंड से 64 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई दो बोट एंबुलेंस आज तक किसी मरीज के काम नहीं आ पाई. राजमहल गंगा घाट पर एक एंबुलेंस खड़ी- खड़ी जर्जर हो चुकी है, जबकि दूसरी साहिबगंज में सड़ रही है. इनका न तो निबंधन हुआ, न ही बीमा, जिससे संचालन की अनुमति ही नहीं मिल पाई.

स्थिति यह है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज नाव न मिलने पर दम तोड़ रहे हैं, जबकि लाखों की लागत से खरीदी गई सरकारी बोट एंबुलेंस नदी में कबाड़ बन चुकी है. आपूर्तिकर्ता का 20 लाख रुपये बकाया भी है, जिस कारण उसने संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन की लापरवाही और सिस्टम की विफलता ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजाक बना दिया है. बीजेपी नेता गौतम यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता के जीवन से खिलवाड़ किया है. वहीं सिविल सर्जन रामदेव पासवान ने भी स्थिति को स्वीकारते हुए इसे गंभीर समस्या बताया.
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह विधानसभा क्षेत्र में आने वाले साहिबगंज में इस तरह स्वास्थ्य व्यवस्था का ध्वस्त होना कई सवाल खड़े करता है. गंगा नदी में बाढ़ से जूझ रही आबादी इलाज के लिए संघर्ष कर रही है और सरकारी सिस्टम खामोश है.

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