नई दिल्ली: सहारा समूह और उसके करोड़ों निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट में सहारा प्रकरण की सुनवाई एक बार फिर शुरू हो रही है. 8, 9 और 10 सितंबर को लगातार सुनवाई की तारीख मुकर्रर की गई है, जिसे निवेशकों और कार्यकर्ताओं ने उम्मीद की किरण के रूप में देखा है.

गौरतलब है कि सहारा समूह पिछले 14 वर्षों से कानूनी झंझावातों में उलझा हुआ है. धीमी और बोरिंग न्याय प्रणाली की वजह से समूह को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. इस दौरान लाखों एजेंट और करोड़ों निवेशक आर्थिक संकट में फंसकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए. सहारा इंडिया, जो कभी देश की आर्थिक धड़कन माना जाता था, आज अपनी साख और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.
राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट में अब नियमित सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है. हालांकि, निवेशकों और एजेंटों के मन में यह डर भी गहराता जा रहा है कि कहीं मामला फिर से तारीखों के चक्कर में न फंस जाए और न्याय की आस अधूरी रह जाए.
सहारा के कार्यकर्ताओं और निवेशकों का कहना है कि अगर इस बार भी न्याय में देरी हुई तो यह केवल सहारा समूह ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी गहरी चोट होगी. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सहारा के एजेंट और निवेशक अपनी नाराजगी का बड़ा राजनीतिक असर दिखा सकते हैं. करोड़ों लोगों के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं का मुद्दा बन चुका है.

