सरायकेला/ पुणे: इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में पांच दशकों से अधिक की नेतृत्वकारी यात्रा पूरी कर चुके आरएसबी समूह ने अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में जिम्मेदार विकास, ऑपरेशनल अनुशासन और हितधारकों के लिए दीर्घकालिक वैल्यू सृजन के प्रति समूह की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा खपत, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जल उपयोग और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े विस्तृत प्रदर्शन आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं. इसके साथ ही स्पष्ट लक्ष्य और वैश्विक रिपोर्टिंग मानकों के अनुरूपता को भी दर्शाया गया है.

आरएसबी समूह के अनुसार स्थापना के समय से ही सस्टेनेबिलिटी इसकी कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है, जिसने इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल निर्णयों को दिशा दी है. सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों में पिछले तीन वर्षों में ऊर्जा उपयोग स्तर में 16 प्रतिशत सुधार शामिल है.
वित्त वर्ष 2022- 23 की तुलना में स्कोप वन और स्कोप टू उत्सर्जन में 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा कुल अपशिष्ट का 97 प्रतिशत लैंडफिल में जाने से रोका गया है, जबकि प्रक्रिया स्तर पर दक्षता पहलों से जल उपयोग में 4 प्रतिशत की कमी आई है. रिपोर्ट में वर्ष 2030 के लिए स्पष्ट लक्ष्यों के साथ पांच वर्षीय डीकार्बनाइजेशन रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है.
आरएसबी समूह के चेयरमैन आर के बेहरा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी की यह यात्रा कारखाना स्तर पर मापनीय कार्यों पर आधारित है. ऊर्जा उपयोग में सुधार, उत्सर्जन में कमी और जल व वेस्ट मटेरियल के जिम्मेदार प्रबंधन पर केंद्रित प्रयासों को 4पी फ्रेमवर्क- परपज, पीपल, प्रोसेस और प्लेनेट- से प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि संचालन में अनुशासन, कुशल कार्यबल और स्पष्ट लक्ष्य ठोस परिणाम देने में सहायक साबित हुए हैं.
ऊर्जा और उत्सर्जन प्रदर्शन पर नजर डालें तो रिपोर्ट के अनुसार कुल ऊर्जा खपत 2,64,850 गीगा जूल रही, जो पिछले तीन वर्षों में लगभग 5 प्रतिशत की कमी दर्शाती है. प्रति टन उत्पादन पर ऊर्जा उपयोग घटकर 1.50 गीगा जूल हो गया है, जो वित्त वर्ष 2022- 23 की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत सुधार है. स्कोप वन और स्कोप टू ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटकर 48,137 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रह गया है. इसी अवधि में स्कोप वन उत्सर्जन में लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.
रिपोर्ट में रिन्यूएबल एनर्जी, ऊर्जा दक्षता और लो-कार्बन तकनीकों पर आधारित पांच वर्षीय डीकार्बनाइजेशन रोडमैप को प्रमुखता से दर्शाया गया है. इसके तहत वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने और 60 प्रतिशत वाटर न्यूट्रालिटी जैसे लक्ष्य तय किए गए हैं. आरएसबी समूह के वाइस चेयरमैन एस के बेहरा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी आरएसबी के लिए कोई अलग पहल नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में अंतर्निहित दृष्टिकोण है. उत्पाद डिजाइन और इंजीनियरिंग से लेकर विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी तक हर निर्णय को दक्षता, जिम्मेदारी और दीर्घकालिक प्रभाव के नजरिये से देखा जाता है.
जल और वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी निरंतर प्रगति दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति टन उत्पादन पर जल उपयोग घटकर 0.61 किलोलीटर हो गया है, जो वर्ष दर वर्ष लगभग 4 प्रतिशत सुधार दर्शाता है. वेस्ट मैनेजमेंट पहलों के तहत कुल अपशिष्ट का लगभग 97 प्रतिशत लैंडफिल में जाने से रोका गया है.
पर्यावरणीय प्रदर्शन के साथ- साथ रिपोर्ट में कर्मचारी सुरक्षा, स्किल डेवलपमेंट और सामुदायिक सहभागिता पर भी विशेष जोर दिया गया है.
आरएसबी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सामाजिक पहलें संचालित की जा रही हैं. सेबी बीआरएसआर और जीआरआई मानकों के अनुरूप यह रिपोर्ट गवर्नेंस, डेटा आधारित परफॉर्मेंस ट्रैकिंग और विनिर्माण कार्यों में सस्टेनेबिलिटी के एकीकरण पर समूह के बढ़ते फोकस को दर्शाती है.

