रांची: झारखंड की राजधानी रांची के कांके अंचल कार्यालय में एक गंभीर जमीन फर्जीवाड़े की शिकायत ढाई माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक अनसुलझी है. यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और अंचल कार्यालय की मिलीभगत को उजागर करता है.

शिकायतकर्ता आशा कुमारी ने 4 जून 2025 को कांके अंचल कार्यालय और रांची उपायुक्त को आवेदन दिया था. उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में उन्होंने और अन्य दो व्यक्तियों ने मौजा नेवरी, कांके अंचल में 37 डिसमिल जमीन खरीदी थी. इस जमीन का दाखिल-खारिज 2010 में ही हो गया था और वह नियमित रूप से लगान का भुगतान कर रही हैं.
लेकिन वर्ष 2022 में शेखर राज नामक व्यक्ति ने फर्जी डीड के आधार पर 25 डिसमिल में से 12 डिसमिल जमीन का अवैध दाखिल-खारिज करवा लिया. इतना ही नहीं, वह जमीन पर ऑनलाइन रसीद भी कटवा रहे हैं. आशा कुमारी ने सवाल उठाया कि जब 2010 में वैध दाखिल- खारिज हो चुका था तो 2022 में कुल जमीन 37 डिसमिल कैसे दर्ज हो गई.
13 जून 2025 को जन शिकायत कोषांग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए अपर समाहर्ता को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था. 19 जून को अपर समाहर्ता ने कांके अंचल अधिकारी को जांच कर प्रतिवेदन देने का आदेश दिया था. लेकिन ढाई माह बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
कांके अंचल कार्यालय पहले से ही जमीन फर्जीवाड़ों और अवैध दाखिल-खारिज के मामलों के लिए बदनाम रहा है. डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली के बावजूद इस तरह के मामले सामने आना सरकारी पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.
जन शिकायत कोषांग और अबुआ साथी पोर्टल की निष्क्रियता भी इस प्रकरण में साफ दिख रही है. शिकायत दर्ज होने के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हुई है. हाल ही में शुरू हुई व्हाट्सएप हेल्पलाइन भी इस मामले में बेअसर साबित हुई है.
सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर नाराजगी जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. पीड़िता आशा कुमारी का कहना है कि यह सिर्फ उनकी जमीन का मामला नहीं है बल्कि न्याय और कानून व्यवस्था का सवाल है.
रांची उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री ने दाखिल- खारिज शिविरों के माध्यम से सक्रियता जरूर दिखाई है लेकिन आशा कुमारी की शिकायत अब तक अनसुलझी है. लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि उपायुक्त इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं.
यह प्रकरण झारखंड में जमीन फर्जीवाड़े और प्रशासनिक सुस्ती का जीता- जागता उदाहरण है. अगर प्रशासन ने समय पर कदम नहीं उठाया तो आम जनता का भरोसा सरकारी तंत्र से और अधिक उठ जाएगा.

