राजनगर: आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से बुधवार को राजनगर प्रखंड क्षेत्र के रोला स्थित पंडित रघुनाथ मुर्मू चौक पर हाषा-भाषा विजय दिवस मनाया गया. सर्वप्रथम पंडित रघुनाथ मुर्मू की प्रतिमा को नमन किया गया तथा प्रार्थना सभा आयोजित की गई. इसके बाद ओलचिकी इतुन आसड़ा रोला एवं कुमडीह के छात्र छात्राओं एवं आदिवासी सेंगेल अभियान के सदस्यों ने रोला गांव में संथाली भाषा के जन जागरण को रैली निकाली. इस दौरान आदिवासी सेंगेल अभियान के जिला संयोजक सुगनाथ हेम्ब्रम ने कहा, कि 22 दिसंबर का तारीख भारत और दुनिया के आदिवासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है. इस दिन मातृभूमि- मातृभाषा विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम प्रदेशों के अलावे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश आदि में भी विजय दिवस मनाया जा रहा है. अंग्रेजों के खिलाफ वीर सिदो कान्हू के नेतृत्व में लड़ी गई लड़ाई के उपरांत ही 22 दिसंबर 1855 को अंग्रेजों ने संताल आदिवासियों को संताल परगना टेनेंसी कानून बनाकर दिया था. उसी प्रकार 22 दिसंबर 2003 को भारत और दुनिया की एकमात्र बड़ी आदिवासी भाषा – संताली भाषा को भारत के लोक सभा में राष्ट्रीय मान्यता मिली. आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया. यह भाषा सम्मान दुनिया भर के आदिवासियों के लिए एक महान भाषा सम्मान है. क्योंकि आज भारत और दुनिया की लगभग सभी आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर खड़ी हैं. संताली भाषा मोर्चा के नेतृत्व में शामिल अनेक संगठनों और भाषा प्रेमियों के संघर्ष और सहयोग से यह सम्भव हुआ है. हमारी मांग है कि संथाली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा मिले और यूजी से पीजी तक मातृभाषा में पठन पठान सुनिश्चित किया जाए. सोनाराम सोरेन ने कहा कि 2021 की जनगणना में आदिवासियों को सरना धर्म कोड देने समेत कुल आठ मांगों को लेकर जन जागरण रथ प्रदेश और कई राज्यों में निकाला जाएगा. इस दौरान जिला संयोजक सुगनाथ हेम्ब्रम, सोनाराम सोरेन, मोठाय बास्के, विजय हंसदा, जॉन मुर्मू , दिकूराम मुर्मू ,रमेश हेंब्रोम, दिकू हांसदा आदि उपस्थित थे.

