आदित्यपुर: आरपीएफ ने रेलवे में विभागीय अधिकारियों के मिलीभगत से रेलवे की संपत्तियों को कौड़ियों के भाव में स्क्रैप माफियाओं को बेचने का खुलासा कर सनसनी फैला दी है. जिसके बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. आरपीएफ ने मानगो के डिमना स्थित मुखियाडांगा इलाके में एक स्क्रैप टाल पर छापेमारी कर भारी मात्रा में रेलवे का कीमती स्क्रैप बरामद किया है. कार्रवाई में टाटानगर में कार्यरत सीनियर सेक्शन इंजीनियर अजीतेश कुमार और स्क्रैप टाल संचालक अनिल कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया गया है. आरपीएफ ने बताया कि रेलवे के पार्ट्स को इंजीनियरों की मिलीभगत से सुनियोजित तरीके से स्क्रैप माफिया को बेचा जा रहा था.

छापेमारी के दौरान टाल से रेल डब्बा यानी वैगन में लगने वाला 510 पीस पार्ट्स बरामद किया गया. जब्त सामान का वजन लगभग तीन टन है और इसकी अनुमानित कीमत करीब दस लाख रुपये बताई गई है. आरपीएफ की जांच में खुलासा हुआ कि पार्ट्स को सप्लाई करने वाली एसआरएम कंपनी की वारंटी अवधि में होने के बावजूद इन्हें जानबूझकर रिजेक्टेड दिखाया जाता था.
जांच में यह भी सामने आया कि राउरकेला निवासी असद अंसारी नाम का स्क्रैप माफिया स्वयं को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर रेलवे के सीएंडडब्ल्यू विभाग से रिजेक्टेड पार्ट्स को रिप्लेसमेंट के नाम पर उठाता था और बाद में इन्हें स्क्रैप टालों में बेच दिया करता था. इंजीनियर अजीतेश कुमार के साथ उसकी मिलीभगत की पुष्टि हुई है. फिलहाल असद अंसारी फरार है.
आरपीएफ ने बताया कि रिजेक्शन संबंधित कागजातों में डीएमई सिद्धार्थ वर्मा के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं, जिस कारण उनकी भूमिका संदेह के घेरे में है. उनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. आरपीएफ इंस्पेक्टर अजीत कुमार सिंह ने कहा कि मामले की गहराई से जांच होगी और रेलवे उपकरणों की खरीद- फरोख्त में शामिल सभी भ्रष्ट अधिकारियों और माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. गिरफ्तार दोनों आरोपियों को घाघीडीह जेल भेज दिया गया है.

