सरायकेला/ Pramod Singh झारखंड सरकार के तुगलकी फरमान से सरकारी अधिकारियों में दुविधा की स्थिति बनी हुई है. लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद भी पिछले डोर से ट्रांसफर- पोस्टिंग की गोपनीयता चिट्ठी जारी कर सरकार ने सबको चौंका दिया है. इसके शिकार सरायकेला अंचलाधिकारी भी हुए हैं.

बता दें कि बीते 10 फरवरी प्रवीण कुमार सिंह ने सरायकेला अंचल अधिकारी के रूप मे उन्होंने योगदान दिया था. दो दिन पहले ही रूम शिफ्ट किया. और उन्हें फिर से अपना बोरिया बिस्तर बांधना पड़ गया. 15 मार्च की तारीख से जारी झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना के आधार पर सुनील कुमार को सरायकेला अंचल का नया अंचलाधिकारी बनाया गया है. बताया गया कि बैक डेट में 15 मार्च की हस्ताक्षरित अधिसूचना का लेटर 18 मार्च को सभी अंचल को प्राप्त हुआ है.
इससे यही प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग का डर सरकार को नहीं है. आखिर तबादला करने की क्या मंशा है ? सरकार के इस ट्रांसफर पोस्टिंग एक सवाल खड़े हो रहे हैं. चुनाव आयोग के गाइडलाइन की माने तो सरायकेला अंचल अधिकारी ना तो प्रभार दे सकते हैं ना ही नया अंचल अधिकारी प्रभार ले सकते हैं. आचार संहिता लगने के बाद कोई भी प्रभाव नहीं लिया जा सकता है ना दिया जा सकता है. प्रवीण कुमार सिंह को रांची मुख्यालय में योगदान देने को कहा गया है.
