नई दिल्ली: गुरुवार को एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. इस अवसर पर उन्होंने प्रोफेसर स्वामीनाथन को मां भारती का सच्चा सपूत बताते हुए कहा कि उनका योगदान केवल एक कालखंड तक सीमित नहीं है. उन्होंने विज्ञान को जनसेवा का माध्यम बनाया और आने वाली सदियों तक भारत की कृषि नीतियों को दिशा देने वाला चेतना जागृत किया.

पीएम मोदी ने बताया कि गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की, जिसमें प्रो. स्वामीनाथन का मार्गदर्शन अहम साबित हुआ. प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर स्वामीनाथन केवल खोज नहीं करते थे, बल्कि किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करते थे. उन्होंने बताया कि सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया, जो उनके योगदान को समर्पित एक विनम्र श्रद्धांजलि है. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए किसानों का हित सर्वोच्च है और वह इसके लिए व्यक्तिगत रूप से किसी भी कीमत चुकाने को तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हित में कभी समझौता नहीं करेगा.
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को समर्पित एक स्मारक सिक्का और शताब्दी स्मारक डाक टिकट भी जारी किया. साथ ही ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के अवसर पर हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं.
विपक्ष ने साधा निशाना
इधर, पीएम मोदी के बयान पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को किसानों की चिंता दस साल पहले करनी चाहिए थी. उन्होंने विदेश नीति को लेकर सरकार को विफल बताया. वहीं शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब किसान दिल्ली आना चाहते थे तो उन्हें नक्सली कहा गया, उन पर बंदूकें चलाई गईं और दीवारें खड़ी की गईं. अब सरकार किसानों की बात कर रही है, जबकि सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है.

