मधुपुर/ Md Aslam

ख्वाजा गरीब नवाज़ हज़रत मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के 814वें उर्स पाक के मुबारक मौके पर मधुपुर के फतेहपुर स्थित कलाम चौक के समीप जनाब इमरान अशरफी के आवास पर जिक्रे नबी-व-औलिया कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया. कार्यक्रम में रूहानियत, भाईचारे और अमन का अनोखा संगम देखने को मिला.
दूर- दराज़ से आए अकीदतमंदों की मौजूदगी में पूरा इलाका ज़िक्र-ओ-अज़कार और नाते रसूल की सदाओं से गूंज उठा.
महफ़िल की सरपरस्ती बंगाल के रानीगंज से आए पीरे तरीक़त हज़रत सैयद अहमद रजा नूरी अशरफी ने की, जिनकी तक़रीर ने लोगों के दिलों को छू लिया. कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज़ व क़ारी मौलाना फहीमुद्दीन मिस्बाही की क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई, जिसके बाद शोरा-ए-कराम ने नाते रसूल और मनक़बत-ए-औलिया पेश कर महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया.
ख़िताब के दौरान हज़रत सैयद अहमद रजा नूरी अशरफी ने कहा कि इस्लाम का बुनियादी पैग़ाम अमन, मोहब्बत और इंसानियत है. उन्होंने बताया कि हज़रत मुहम्मद ने पूरी दुनिया को इंसाफ़ और भाईचारे की तालीम दी, जबकि औलिया-ए-कराम ने उसी पैग़ाम को अपने अमल से ज़मीन पर उतार कर समाज में प्यार की बुनियाद रखी. उन्होंने कहा कि औलिया-ए-कराम ने तलवार से नहीं, बल्कि अख़लाक़ और मोहब्बत से दिलों को जीता और नफ़रत, ज़ुल्म व ज़बर को इंसानियत और इश्क़-ए-इलाही से मात दी.
मौजूदा हालात में फिर से ख्वाजा गरीब नवाज़ जैसी दरवेश सिफ़त शख्सियत की आवश्यकता है, जो समाज को जोड़ने का काम कर सके. महफ़िल में जनाब इमरान अशरफी और उनकी धर्मपत्नी शहनाज़ खातून की हज-उमरा यात्रा की रवानगी का जिक्र भी अहम रहा. दोनों देवघर एयरपोर्ट से दिल्ली होते हुए हज बैतुल्लाह के लिए रवाना होंगे, और उलमा-ए-कराम तथा अकीदतमंदों ने उनके लिए मक़बूल हज-उमरा और सलामती भरे सफ़र की दुआ की.
कार्यक्रम में हज़रत मौलाना सूफ़ी उजैर अहमद अशरफी, हज़रत मौलाना मुस्लिम अख्तर शिवानी, हज़रत मौलाना जमील अख्तर, मौलाना जमशेद, शफकत हुसैन अशरफी, गुफरान अयूबी, हज़रत मौलाना गुलाम हुसैन जामी, हाजी सुल्तान अहमद, अख्तर हसनैन क़ादरी, एनुल हुदा, फ़ज़लुर रहमान सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शरीक हुए. अंत में सलातो-सलाम और सामूहिक दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया.

