संपादक की कलम से झारखंड के सरायकेला के आदित्यपुर इंडस्ट्रियल पार्क में पिछले साल स्थापित 650 बेड का नेताजी सुभाष सुपर मल्टी स्पेशलिटी मेडिकल कॉलेज अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता प्राप्त कर चुका है. इस सत्र से यहां एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने जा रही है. यह न केवल सरायकेला बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि है. पिछड़े इलाकों में विश्वस्तरीय चिकित्सा और शिक्षा संस्थान की स्थापना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक भविष्य को बदलने का संकेत देती है.

इस क्रांति के सूत्रधार हैं नेताजी सुभाष ग्रुप के चेयरपर्सन मदन मोहन सिंह. मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर उन्होंने जिस तरह शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबी लकीर खींची है, वह अभूतपूर्व है. 2005 में पटना में नेताजी सुभाष इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरुआत करके उन्होंने दो पॉलिटेक्निक कॉलेज, बिहटा में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और फिर जमशेदपुर के पोखरी में नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय की स्थापना कर दी. आज जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में उनके करीब एक दर्जन स्कूल हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दे रहे हैं.
सिर्फ एक दशक में मदन मोहन सिंह के नेतृत्व में 1 लाख से अधिक छात्र- छात्राएं पढ़ाई पूरी कर देश- विदेश में अपना नाम कमा रहे हैं. वहीं तीन हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है. बिहार और झारखंड में इस पैमाने पर शिक्षा और स्वास्थ्य का जाल कोई अन्य उद्यमी नहीं बिछा पाया है. मदन मोहन सिंह अपनी सफलता का श्रेय पिता के आदर्शों और ईश्वर की कृपा को देते हैं. उनका मानना है कि शिक्षा से ही समाज में बदलाव और क्रांति लाई जा सकती है और युवा पीढ़ी शिक्षित होगी तो राज्य और देश प्रगति करेगा.
2024 में आदित्यपुर में मेडिकल कॉलेज स्थापित कर उन्होंने एक ऐसी लकीर खींची है, जिसे आने वाले दशकों तक मापदंड माना जाएगा. उनकी योजना है कि हर साल एक नया मेडिकल कॉलेज अस्पताल खुले ताकि स्वास्थ्य सेवा में क्रांति आए और गरीबों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके.
ऐसे युगपुरुष को न केवल बिहार और झारखंड बल्कि पूरा देश सम्मान दे रहा है. समाज का एक बड़ा तबका अब मदन मोहन सिंह को पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग कर रहा है. सरकार को चाहिए कि ऐसे व्यक्तित्व को शिक्षा और स्वास्थ्य जगत का सर्वोच्च सम्मान देने पर गंभीरता से विचार करे, क्योंकि ऐसे लोग दशकों में एक बार जन्म लेते हैं और राष्ट्र का भविष्य संवारते हैं.
(यह लेख लेखक के निजी विचारों और समाज के प्रबुद्ध जनों से बातचीत पर आधारित है.)

