सरायकेला: कुचाई प्रखंड अंतर्गत पंचायत छोटा सेंगोई के छोटा बण्डीह गांव में बुधवार को वन अधिकार कानून 2006 और झारखंड पेसा नियमावली 2025 के तहत पत्थलगड़ी कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व ग्रामीण मुंडा मंगल सिंह मुण्डा और सीएफआरएमसी अध्यक्ष बनवारी लाल सोय ने किया. इस दौरान 188.02 एकड़ वन भूमि पर शिला स्थापित कर सामुदायिक वन अधिकार को चिह्नित किया गया.

जंगल की पारंपरिक सीमा पर पूजा- पाठ के साथ पत्थलगड़ी कर टिकाऊ धरोहर और विरासत स्थापित की गई. ग्रामीण पारंपरिक वेश- भूषा में नाचते- गाते हुए पत्थलगड़ी स्थल तक पहुंचे. पहान द्वारा देशवाली, सिंगीबोंगा और बुरुबोगा को चढ़ावा अर्पित कर सामुदायिक कल्याण की कामना की गई.

रैली के दौरान ग्रामीणों ने “जंगल जमीन किसका है”, “अपना गांव में अपना राज”, “सबसे ऊंचा ग्राम सभा” और “जंगल काटना बंद करो” जैसे नारे लगाए.झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के केंद्रीय सदस्य सोहन लाल कुमार ने कहा कि ऐतिहासिक अन्यायों के निराकरण के लिए वन अधिकार कानून 2006 लागू किया गया है. उन्होंने बताया कि ग्राम छोटा बण्डीह को वर्ष 2024 में 188.02 एकड़ वन भूमि पर सामुदायिक वन अधिकार की मान्यता मिली है. उन्होंने धारा 5 के तहत ग्राम सभा को वन, वन्य जीव और जैव विविधता संरक्षण का अधिकार मिलने की जानकारी दी.
संसद प्रतिनिधि मानसिंह मुण्डा ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि सामुदायिक प्रयासों से जंगल का घनत्व बढ़ा है. सुखराम मुण्डा ने जंगल में आग नहीं लगाने और पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया. करम सिंह मुण्डा ने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जंगल संरक्षण जरूरी है, जबकि धर्मेन्दर सिंह मुण्डा ने अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही.
कार्यक्रम में कई ग्रामीण प्रतिनिधि, मानकी-मुंडा एवं समाज के लोग उपस्थित रहे. वक्ताओं ने कहा कि विधि के दायरे में रहकर वनों का संरक्षण और संवर्धन करना सभी की जिम्मेदारी है. जंगल बचेगा तो पर्यावरण संतुलन बना रहेगा और मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा.मौके पर ग्रामीण मुंडा मंगल सिंह, सीएफआरएमसी के अध्यक्ष बनवारी लाल सोय, अशोक मानकी, सोहन लाल कुम्हार, सुखराम मुंडा, आशोक मानकी, मानसिंह मुंडा, टेने मुंडारी, फागु मुंडा, शैलेन्द्र हेंब्रम, रासाय मुंडा, लक्ष्मण हेंब्रम, बागुन सोय, दुखु मुंडा, मुटु भूमिज, सुश्री हीरा मुनी भूमिज, सुखराम मुंडा, प्यारी भूमिज, सोनाराम भूमिज, नारायण सोय, बुधन लाल भूमिज, बसंती सोय, बनवारी लाल सोय, मुनु भूमिज, धर्मेंद्र सिंह मुंडा, करम सिंह मुंडा, नोगेन्द्र सिंह मुण्डा, सोंगड़ा मुंडा, कारू मुंडा आदि उपस्थित थे.

