कुचाई: कुड़मी आंदोलन को देखते हुए अब आदिवासी समुदाय ने भी मोर्चा खोल दिया है. आदिवासी समाज ने अपने अस्तित्व, संस्कृति और कानूनी अधिकारों पर किसी भी प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं करने का संकल्प लिया है. इसको लेकर मंगलवार को कुचाई में मंगलवार को कोल्हन आदिवासी एकता मंच कुचाई शाखा का गठन किया गया.

जिसमें मंगल सिंह मुंडा को अध्यक्ष चुना गया जबकि, उपाध्यक्ष महादेव मिंज, बाबू सोय, भारत सिंह मुंडा, सीता सोय और मानसिंह मुंडा, सचिव पद के लिए दशरथ उरांव और सुरेश सोय तथा कोषाध्यक्ष पद के लिए पार्वती गागराई और रामचंद्र मुंडा चुने गए. इसके अलावा सलाहकार समिति में बुधन लाल सोय, केपी सेट सोय, लुबू राम सोय, लखीराम मुंडा, रामचंद्र सोय, चांदमुनि मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, गोपाल सिंह मुंडा और बाबूराम सोय शामिल हैं.

समिति गठन कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ और युवा सदस्य भी उपस्थित रहे. इसमें मनोज मृदुईय, दास सोय, जगमोहन सोय, धर्मेंद्र कुमार मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, बुधराम मुंडा, सुखलाल मुंडा, भोज संगा, राजमोहन गुदवा, महेश मिंज, महेश्वर उरांव, आशु मुंडा और घनश्याम मुंडा समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल थे.
समाज के अगुवाओं ने कहा कि कुड़मी/ कुडमी समुदाय को ST सूची में शामिल करने के प्रयास समाज पर सीधा प्रहार है. आदिवासी समाज लगातार कई हमलों का सामना कर रहा है. इनमें मुख्य रूप से कुड़मी/महतो द्वारा ST सूची में शामिल होने का प्रयास. गैर- आदिवासियों द्वारा समाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मान- सम्मान पर हमले. CNT/ SPT कानून का सख़्ती से लागू न होना. पेसा कानून का कार्यान्वयन न होना. आदिवासी कानूनों को कमजोर करने का प्रयास. पांचवीं अनुसूची राज्य होने के बावजूद जल, जंगल और जमीन का संरक्षण न होना शामिल हैं समिति ने स्पष्ट किया कि ये सभी मुद्दे समाज के अस्तित्व, आरक्षण, जमीन, नौकरी और जनप्रतिनिधियों के कानूनी अधिकारों से जुड़े हैं. उन्होंने संवैधानिक आंदोलन के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करने और समाज को संगठित करने की अपील की. समिति ने समाज के लोगों से सहयोग का आह्वान किया ताकि आदिवासी समाज का अधिकार सुरक्षित रहे और उनके पूर्वजों द्वारा दिया गया विरासत का संरक्षण सुनिश्चित हो सके.

