सरायकेला/ Pramod Singh सरायकेला- चाईबासा मार्ग स्थित सांगाजाटा फुटबॉल मैदान में झारखंड की दशा और दिशा विषय पर कोल्हान रक्षा संघ द्वारा एक सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में कोल्हान क्षेत्र के तीनों जिलों के अलावा ओडिशा से भी बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष एवं झारखंड प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डीबार जोंकों ने की. अपने संबोधन में उन्होंने कोल्हान क्षेत्र की मूल समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में हो भाषा को शामिल कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए सभी को एकजुट होकर अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता है.
उन्होंने मानकी- मुंडा और अन्य पारंपरिक पदाधिकारियों के लंबित मानदेय भुगतान पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने सरकार से मांग की कि मानकी-मुंडा परगना को प्रतिमाह 15 हजार रुपये, मुंडा, माझी बाबा और ग्राम प्रधानों को 10 हजार रुपये तथा दिउरी और पुजारियों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए. सम्मेलन में यह भी मांग उठाई गई कि झारखंड की जमीन पर उद्योग स्थापित करने वाले उद्योगपतियों को रैयतदारों को अपने लाभ में हिस्सेदारी देनी चाहिए.
मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता कौशलेंद्र प्रताप ने आदिवासी अधिकारों पर जानकारी देते हुए कहा कि अपने अधिकारों और पांचवीं अनुसूची के संरक्षण के लिए समाज को एकजुट होकर लंबी लड़ाई लड़नी होगी. वहीं चाईबासा बार काउंसिल के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद ने भी लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की.
ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य जोसाई मार्डी ने युवाओं से अधिक एकजुट होकर अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया. मांझी परगना महाल के देश परगना नवीन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज को एकजुट होकर कोल्हान का मालिक बनना होगा.
कोल्हान रक्षा संघ के केंद्रीय सदस्य दुर्गा हेंब्रम ने कहा कि पांचवीं अनुसूची का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है. उन्होंने समाज से जागरूक होकर प्राकृतिक संसाधनों पर अपने अधिकार के लिए आगे आने की अपील की.
सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि कोल्हान रक्षा संघ गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाएगा और समाज को संगठित करेगा. साथ ही कोल्हान क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी इस तरह के महासम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.
कार्यक्रम में महासचिव मानसिंह हेम्ब्रम ने स्वागत भाषण दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परेश नायक ने ओड़िया भाषा में किया.
सम्मेलन में डीबार जोंकों, अधिवक्ता कौशलेंद्र प्रसाद, विश्वनाथ सिंह सरदार, जसाई मार्डी, सुरेश सोय, बागुन बोदरा, डोबरों बिरूली, नवीन मुर्मू, राजाराम हांसदा, कृष्ण सामड, रामेश्वर प्रसाद, रविंद्र मंडल, धनपति सरदार, सुमित्रा जोंकों, जयसिंह हेंब्रम, सुखदेव हेंब्रम, भीम सिंह हेंब्रम, रघुनाथ लागुरी, सिद्धेश्वर संवैया, हरिश सवैया, लक्ष्मण मंडल, परेश नायक और दुर्गा हेंब्रम सहित सिंहभूम और ओडिशा के विभिन्न गांवों से आए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.

