चाईबासा/ Jyotish Mahali आदिवासी छात्र एकता केंद्रीय कमेटी ने झारखंड के अनुसूचित पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव का विरोध करते हुए 21, 22 और 23 फरवरी 2026 को कोल्हान प्रमंडल में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण बंद का आह्वान किया है. संगठन ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर चुनाव अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है.

संगठन के संयोजक इंद्र हेम्ब्रम द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ZC 1, 244 1 तथा 243Q 1 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय गठन और चुनाव को लेकर विशेष प्रावधान हैं. उनका कहना है कि जब तक संसद द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग कानून नहीं बनाया जाता, तब तक इन इलाकों में नगर निकाय चुनाव कराना संविधान की भावना के विपरीत होगा.
ज्ञापन में पंचायत्स एक्सटेंशन टू शिड्यूल एरियाज एक्ट 1996 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जिस प्रकार पंचायती राज व्यवस्था के लिए पृथक कानून बनाया गया, उसी प्रकार नगर निकायों के लिए भी अनुसूचित क्षेत्रों हेतु अलग अधिनियम बनाया जाना चाहिए.
संगठन ने आरोप लगाया है कि झारखण्ड म्युनिसिपल एक्ट 2011 को लागू कर अनुसूचित जिलों में चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है.
पत्र में यह भी कहा गया है कि टाटा स्टील का लीज नवीनीकरण वर्ष 2026 में प्रस्तावित है और पूर्वी सिंहभूम सहित कई आदिवासी बहुल क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया तेज की जा रही है. संगठन ने आशंका जताई है कि इससे जल जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
आदिवासी छात्र एकता ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर राज्य सरकार द्वारा जारी नगर निकाय चुनाव अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है. ज्ञापन की प्रति कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त और संबंधित उपायुक्तों को भी भेजी गई है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित बंद लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा तथा आवश्यक सेवाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी. अब देखना होगा कि इस मामले में राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.

